सभी लेख
इन्द्र प्र णो रथमव पश्चच्चित्सन्तमद्रिवः । पुरस्तादेनं मे कृधि
॥ ऋः ८.८०.४
तर्जः माझी व्यथा नाही कुणाशी बोलतो
हे इन्द्र! मेरे रथ की,रक्षा...
शहीद धर्मवीर और प्रियदर्शन
बटाला और कानपुर के श्री धर्मवीर तथा प्रियदर्शन ने अम्बाला में हिंदी की रक्षा हेतु वीरगति प्राप्त...
पृष्ठभूमि
सन् 1948 में हैदराबाद में रजाकारों की गतिविधियाँ अपने चरम पर थीं। आर्य समाज और राष्ट्रवादी शक्ति को कुचलने के...
पृष्ठभूमि
पंजाब में हिन्दी की रक्षा के लिए जब सत्याग्रह का बिगुल बजा, तब हरियाणे के वीर जत्थों में संगठित होकर...
नारी जो बने, सुत ऐसे जने।
नारी जो बने, सुत ऐसे जने।पितरों की आज्ञा मान रे ऽधर्म निभाने वाले हों।कोई राम...
हे विभो आनन्द सिन्धोमे च मेधा दीयताम्।
हे विभो आनन्दसिन्धोमे च मेधा दीयताम्।यच्च दुरितं दीनबन्धोतच्च दूरं नीयताम्।। टेक।।
चंचलानि चेन्द्रियाणिमानसं मे पूयताम्।शरणं...
स्वामी तेरे सिवा कोई नहीं है
और किसका मैं पकडुँ सहारा।स्वामी तेरे सिवा कोई नहीं है।। टेक।।
जिन्दगी को मैं खोता रहा...
“खुद का अव्यक्त”
व्यक्त की आभा इतनी सुन्दर।अव्यक्त तो होगा ही सुन्दरतम।।अपने आप के अव्यक्त को समझ ले।विभूतिमय है वो है...
“आह्वान-पुकार-स्वीकार”
ब्रह्म आह्वान से चतुः आधान।अन्न बल वेग व विज्ञान।। टेक।।
उच्च निम्न मध्यमपुकारते हैं ब्रह्म।। 1।।
यात्री व मंझिल करमपुकारते हैं ब्रह्म।।...
“ब्रह्म निकटतम”
पर उपकार धर्म शृंगार,जीवन का आधार है।सुख जीवन पूर्व हैं तोसुख ही जीवन पार है।। टेक।।
सत्संग करते पढ़ते पढ़तेजीवन...
“आत्म ब्रह्म में”
ओ3म् नारायणः, ओ3म् खं ब्रह्म।ईशावास्यमिदं सर्वम्… (2)।। टेक।।
सृष्टि यज्ञ सुरचना, संधि संधि अर्चना।समीपतम है हितकर, ब्रह्म ज्योतित है...
आ ब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम्।
आ ब्रह्मन् ब्राह्मणोब्रह्मवर्चसी जायताम्।
आ राष्ट्रे राजन्यः शूर इषव्योऽतिव्याधी महारथो जायताम्।
दोग्ध्री धेनुर्वोढाऽनड्वानाशुःसप्तिः पुरन्धिर्योषा
जिष्णू रथेष्ठाः सभेयोयुवास्य यजमानस्य वीरो...
मनीषी चिन्तन
सत्य सनातन प्राणवंत है। नित्य निरंतर नव वसंत है।
जो भी मेरे पुरखों को गाली देगा,धर उसकी छाती पर दोनाली...
मुफ्तखोर बन जाय न अपना देश कमेरों का।
मुफ्तखोर बन जाय नअपना देश कमेरों का।कुत्ते मिलकर मुँह न नोच लेंबब्बर शेरों...
अभागिनी गाय
सपनों में अनगिन आवाजें आती हैं।कोई नहीं दिखता व्यथा बढ़ाती है।हाथ चाट कर कोई मुझे उठाती है।रोती आँखों से...
जय गैया मैया जय गैया मैया
जय गैया मैया जय गैया मैया1सुधा की माखी तू सोन पाखीबढ़ी कलाई दे बंद राखीतू...
आर्य वीर दल आर्य जनों की पावन निर्मल थाती है
आर्य वीर दल आर्य जनों कीपावन निर्मल थाती हैसाहस दूल्हा विनय...
घातों पर प्रतिघात वार पर वार करारा
घातों पर प्रतिघात वार पर वार कराराआर्य वीर दल चला तोड़ने कुत्सित कारा।।स्थाई।।
जहां कहीं...
आर्यवीरदल वीर व्रती है
आर्यवीरदल वीर व्रती है,पावन हल्दीघाटी है।त्याग तपस्या शक्तिभक्ति के हवनकुण्ड की माटी है॥
आर्यवीरदल हर दलदल मेंकमल खिलानेवाला...
बोल बोल निर्भय आर्यवीर जय जय।
आर्यवीर दल जयबोल बोल निर्भय/आर्यवीर जय जय।अजय विजय जय जय/आर्यवीर दल जय।
हर मुश्किल का हल/सेवा...
मेरा नरेन्द्र, मेरा नरेन्द्र
मेरा नरेन्द्र, मेरा नरेन्द्र।अनुपम, अद्भुत, सक्षम सुरेन्द्र।।टेक।।
बस राष्ट्र, राष्ट्र -जपता माला।तोड़े हर जंग लगा ताला।बदले न कभी...
अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा।
अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा।छोड़ नींद का राग अमृत बरस रहा।।
चार बजे के पीछे...
सृष्टि की आदि से देश सिरमौर था।
सृष्टि की आदि से देश सिरमौर था।आज भी है और कल भी रहेगा॥टेक॥
ऋषियों की...
ब्रह्मन् स्वराष्ट्र में हों
ब्रह्मन् स्वराष्ट्र में हों,द्विज ब्रह्म तेजधारी।क्षत्रिय महारथी हों,अरिदल विनाशकारी।। 1।।
होवें दुधारु गौएं,पशु अश्व अशुवाही।आधार राष्ट्र की हों,नारी...
बोल बोल निर्भय आर्यवीर जय जय।
आर्यवीर दल जयबोल बोल निर्भय/आर्यवीर जय जय।अजय विजय जय जय/आर्यवीर दल जय।
हर मुश्किल का हल/सेवा...
दयानन्द के वीर बाँके सिपाही
दयानन्द के वीर बाँके सिपाही,हलचल मचाने चले ऽऽ तूफान लाने चले।।
आलस की निद्रा में जो सो...
क्रान्ति - शान्ति की खान हैं गुरुकुल।
क्रान्ति - शान्ति की खान हैं गुरुकुल।संस्कृति के जय - गान हैं गुरुकुल।तक्षशिला -...
है भला तेरा इसी में माँस खाना छोड़ दे।
है भला तेरा इसी मेंमाँस खाना छोड़ दे।इस मुबारिक पेट मेंकब्रें बनाना...
ओ3म् सुखकन्द से सच्चिदानन्द से याचना है।
ओ3म् सुखकन्द से सच्चिदानन्द से याचना है।श्रेय पथ पर चलूं कामना है।। टेक।।
कृत कुकर्मों...
कुम्भकरण से हनुमानों से
कुम्भकरण से हनुमानों सेपूछ रहा है आर्यसमाज।दयानन्द की सन्तानों सेपूछ रहा है आर्यसमाज।
कृणवन्तो विश्वमार्यम् कासपना कब पूरा...
ये सत्य का प्रकाश है उभर के रहेगा।
ये सत्य का प्रकाश है उभर के रहेगा।ये सत्य-सूर्य है कि तिमिर हरके...
ब्रह्म मेरा घर है
ब्रह्म मेरा घर है, ब्रह्म मेरा दर है,ब्रह्म रास्ता है।वेद की दृष्टि से, देखें तो समझें,ब्रह्म हर...
सफलं भवतु सफलं भवतु ….
सफलं भवतु सफलं भवतु ….शुभम् भवतु सुगमम् भवतुकल्याणं भवतु मंगलम् भवतु,आरोग्यं भवतु सफलं भवतु…हे लक्ष्य वीर...
जिसपर था सर्वस्व लुटाया
जिसपर था सर्वस्व लुटाया,मेरा वो अरमान कहां है?बोलो नेहरू बोलो गांधी,मेरा हिन्दुस्तान कहां है?भारत आर्यावर्त कहां है??
सैंतालीस...
क्यों नहीं व्यापार करते आप असली नाम से।
क्यों नहीं व्यापार करते आप असली नाम से।छल -प्रपंचों से भरी क्यों जिन्दगी...
बेटी गर्भ में यूँ रोई
बेटी गर्भ में यूँ रोई,मैया बचाई ले मेरी जान को।मेरो दोष नहीं कोई,भूलूँ न तेरे अहसान...
!! ओ३म् !!
"कृण्वन्तो विश्वमार्यम्"
ॐ में गवायवं में वत्पर्य से वो मनांसि जानताम्।
महर्षि दयानन्द सरस्वती आर्य समाज
शताब्दी समारोह
वेद प्रचार सप्ताह...
श्री सत्य सनातन वेद मन्दिर समिति का वार्षिकोत्सव
🙏 जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन एवं जीवन निर्माण कार्यशाला 🙏
...
यज्ञ महोत्सव – शारदीय नवसस्येष्टि (दीपावली) विशेष
स्थान: दर्शन योग महाविद्यालय (महात्मा प्रभु आश्रित कुटिया), सुन्दरपुर, रोहतकआयोजक: दर्शन योग...
उदगादयमादित्यो विश्वेन सहसा सह। द्विषन्तं मह्यं रन्धयन्मो
अहं द्विषते रधम्॥ ऋः १. ५०.१३
तर्जः माझा होशिलका (3)
जानो अहिंसा, अहिंसा...
को अस्मिन्नायो व्यदघाद विषुवृतः, पुरुवृतः सिन्धु सृत्याय जाताः ।
तीव्रा अरुणा लोहिनीस्ता स्त्रधूस्त्राः, उर्ध्वा अवाचीः पुरुषे तिरश्चीः
॥ अथ. १०.२.११
तर्जः...
ऋतर्वान ऋतर्जाता ऋता॒वृधौ घोरासौ अनृत॒द्विषः ।
तेषां वः सुम्ने सु॑च्छर्दिष्टमे नर्ः स्याम् ये च सूरय॑ः ॥ ऋ. ७.६६.१३
तर्जः मला लावल्या...
उत त्वाव॑धिरं व॒यं श्रुतर्कर्ण सन्त॑मूतयें। दूरादि॒िह हवामहे
।। ऋ. ८.४५.१७
तर्जः मला तुझे मनोगत मला कभी कळेल
कही जिसे मनोव्यथा घटा...
तच्चक्षुदे॒ववर्हितं पुरस्तांच्छुक्रमुच्चरत।
पश्येम शरदः शतं जीवैम शरदः शृत शृणुयाम ।
1 शरदः शतं प्र ब्रवाम शरदः शतमदीनाः
स्याम शरदः शतं...
स इत्स्वा भुवनेष्वास य इमे द्यावापृथ्विी जुजान ।
उ॒र्वी गंभीरे रज॑सी सुमेकै अवंशे धीरः शच्या समेरत्
॥ ऋ. ४.५६.३
तर्जः मर्जी तुमची...
यज्ञायज्ञा वो अग्नये गिरागिरा च दक्षसे ।
प्रप्र वयममृतं जातवेदसं प्रियं मित्रं न शंसिषम् ।।
साम. ३५ ऋ. ६.४८.१
तर्जः मरनित्यु...
अवा नो वाजयुं रथं सुकरं ते किमित्यरि। अस्मान्त्सु जिग्युषस्कृधि
।। ऋ. ८.८०.६
तर्जः मयिलाय हो मयिलाय परन्तुवाय मळयिल
कई बार हम...
अपन्धन्पवते मृघोप सोमो अराव्णुः। गच्छन्निद्रस्य निष्कृतम्।।
साम. ५१०,१२१३ ऋ. ६.६१.२५
तर्जः मयनी पोई, न्यान मयनी पोई
जान मेरी, ऐ सोम सरि,...
ते वो हृदे मन॑से सन्तु य॒ज्ञा जुष्टय॑सो अ॒द्य घृतर्निर्णिजो गुः।
प्र व॑ः सुतासौ हरयन्त पूर्णाः क्रत्वे दर्शाय हर्षयन्तः पीताः।। ऋ....
न तं विदाथ य इमा जजानान्यद्युष्माकमन्तरं बभूव ।
नीहारेण प्रावृता जल्प्या चासतृप उक्थशासश्चरन्ति।।
ऋ. १०.८२.७ यजु. १७/३१
तर्जः मयनी ममतल भार्याभतकलू-राग...
वि जानीह्यार्यान्ये च दस्य॑वो व॒र्हिष्मते रन्ध्या शासदव्रतान् ।
शाकी भव॒ यज॑मानस्य चोद्विता विश्वत्ता ते सधुमादेषु चाकन ॥ ऋ. १.५१.८
तर्जः मयतमी...
अ॒स्य शासु॑रुभयया॑सः सचन्ते ह॒विष्म॑न्त उ॒शिजो ये च॒ मर्ताः।
दि॒वश्च त्पूर्वो न्य॑सादि॒ होतापृच्छययो॑ वि॒श्वपति॑वि॒क्षु वे॒धाः ॥ ऋ. १.६०.२
तर्जः मन्दार पू मूली...
ओ३म्
“ऋते ज्ञानात् मुक्ति:” – शाश्वत ज्ञान से ही मुक्ति है।
प्रश्नोपनिषद् ज्ञान समारोह
आत्मोन्नति की कामना से विशेष आयोजन
आर्य समाज एवं आर्य...
आर्य समाज आदर्श नगर, दिल्ली-33 (पंजी)
महर्षि पतञ्जलि कृत योग-दर्शन चर्चा
श्रद्धेय स्वामी विवेकानन्द जी परिव्राजक (रोजड़, गुजरात)
आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने...
आर्य समाज डबरा
बारहवाँ चार दिवसीय वेद प्रचार उत्सव
स्वामी दयानन्द सरस्वती जी एवं स्वामी श्रद्धानन्द जी की पावन स्मृति में, आर्य...
॥ ओ३म् ॥
आर्य समाज एन.एच. 3, एन.आई.टी. फरीदाबाद
श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में वेद प्रचार कार्यक्रम
परमपिता परमात्मा की असीम अनुकम्पा से,...
॥ वेदोऽखिलो धर्ममूलम् ॥
आर्य समाज गंगानगर, मेरठ
26वाँ वार्षिकोत्सव एवं वेद प्रचार समारोह
आर्य समाज गंगानगर, मेरठ द्वारा आर्य समाज के 156वें...
॥ ओ३म् ॥
गुरु विरजानन्द सरस्वती के 157वें निर्वाणोत्सव पर
यज्ञोपवीत संस्कार एवं विश्व समृद्धि महायज्ञ
गुरु परंपरा के आलोक में, गुरु विरजानन्द...
आर्य समाज — मानव सेवा के 150 वर्ष
आर्ष न्यास एवं RSV ग्रुप ऑफ़ स्कूल्स का संयुक्त आयोजन
।। ओ३म् ।।
आर्य समाज...
क्रियात्मक-योग प्रशिक्षण शिविर02 से 09 नवंबर 2025स्थान - वानप्रस्थ साधक आश्रम, आर्यवन, रोजड़ , त.-तलोद, साबरकांठा, गुजरात-383307.दूरभाष - 9427059550, 9116356961,...
आर्य समाज के 150 वर्ष पूर्ण — वेद प्रचार कार्यक्रम
आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य...
अति निहो अति सृधोत्यचित्तिरति द्विषः ।
विश्वा ह्युऽग्ने दुरिता तर॒ त्वमया॒स्मभ्यसहवीरं र॒यिं दाः
॥ अथर्व. २.६.५
तर्जः मनसी मनसी कुयता मिन्मे
बनते...
सत्यं वृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म युज्ञः पृथिवीं धारयन्ति ।
सा नौ भूतस्य॒ भव्य॑स्य॒ पत्युरुं लोकं पृथ्विी नंः कृणोतु ॥१
॥ अथर्वः...
सिंह॑ः पावकाः प्रति॑ता अभूवन्त्स्व॒स्ति नंः पिपृहि पारमा॑साम् ।
इन्द्र त्वं र॑थि॒रः पाहि नो र॒िषो म॒क्षूम॑क्षू कृणुहि गोजिततो॑ नः
॥ ऋ. ३.३१.२०
तर्जः...
मनसे चेतसे ध्यि आकूतय उत चित्तये ।
मृत्यै श्रुताय॒ चक्षये विधेम ह॒विषा व॒यम् ॥ अथर्व. ६.४१.१
तर्जः मन में तुट्टा चिनुंगीदाने...
अ॒प॒घ्नन्प॑वते॒ सृधोऽप॒ सोनो॒ अरा॑ग्णः। गच्छ्रन्निन्द्र॑स्य निष्कृतम्
॥ ऋ. ६.६३.२४
तर्जः मनदारील इन्नुम उन किनावुन कुण्डु ता
सा रे ग प नी सा,...
प्रीणीताश्वान्हितं जयाथ स्वस्तिवाहुं रमित्कृणुध्वम् ।
द्रोणर्णाहावमव॒तमश्म॑चक्रमंस॑व्रकोशं सिञ्चता नृपार्णम् ॥ ऋ. १०.१०१.७
तर्जः मन करा रे प्रसन्न
अश्व करो रे प्रसन्नसर्वसिद्धि...
वि॒द्मा हि त्वा॑ तुविकूर्मि तुविद॑ष्णं तु॒वीम॑घम् । तुव॒मा॒त्रमवतो॑भिः
।। साम ७२६
तर्जः मधुर यमुनो मनसित मासम (राग-दरबारी)
तू कितना कृपालु है...
मूर्धानमस्य संसीव्याथर्वा हृदयं च यत्।
मस्तिष्कादूर्ध्वः प्रैरयत्पवमानोऽधि शीर्षतः ॥
यद्वा अथर्वणः शिरोदेव कोशः समुष्जितः ।
अथर्व. १०.२.२६ यत्प्राणो अभिरक्षति शिरो...
जन्म एवं परिचयभटगांव, जिला सोनीपत (हरियाणा) में दहिया गोत्र के जाट क्षत्रिय कुल में वीर चौ० शेर सिंह शेर जी...
जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
भिवानी जिले की दादरी तहसील में स्थित छोटा सा ग्राम मौड़ी (मोड़ो) जाट क्षत्रियों का गांव है,...
जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
आपका जन्म ग्राम कलोई, तहसील झज्जर, जिला रोहतक निवासी चौ० भुण्डाराम धनखड़ के घर विक्रम संवत् 1948...
जिह्वाया अग्रे मधु मे जिह्वामूले मधूलकम ।
ममेदह क्रतावसो मम चित्तमुपायसि ॥ १॥ अथ. १/३४/२
तर्जः मधुमागसी माझा सख्या तरी
माधुर्य प्राप्ति...
प॒वित्रेण पुनीहि मा शुक्रेण॑ देव॒ दीद्यत्। अग्ने॒ क्रत्वा क्रतँ १२ ॥ यजु. १६/४०
तर्जः मणी कुट्टी कुरुम्बु डो रम्मी पूवाली
मेरे सच्चे...
यद्दीळाविन्द्र यत्स्थिरे यत्पशनिपराभृतम्। वसु स्पार्ह तदा भर।।
साम. २०७, १०६७, अथ २०.४३.२
तर्जः मळविलिन नरगिन्दे मुखमुन्नु काणा
परमैश्वर्यवाले इन्द्र तुम्हारा, ऐश्वर्य कितना...
य॒ज्ञस्य॒ चक्षु प्रभृतिर्मुखं च वाचा श्रोत्रेण मन॑सा जुहोमि ।
इ॒मं य॒ज्ञं विर्ततं वि॒श्वक॑र्मणा दे॒वा य॑न्तु सुमनुस्यमानाः। अथर्व. २.३५.५
तर्जः मळविल इन...
श्रीणामुदारो धरुणो रयीणां मनीषाणां प्रार्पणः सोमगोपाः ।
वसुः सूनु सहसो अप्सु राजा वि भात्यग्र उषसामिधानः ॥ ऋ. १०.४५.५
तर्जः मळविल्लिन नरगिन्दे...
स्तुता मया वरदा वेदमाता प्र चोदयन्तां पावमानी द्विजानाम्
आयुः प्राणं प्रजां पशुं कीर्ति द्रविणं ब्रह्मवर्चसम्। मह्यं दत्त्वा व्रजत ब्रह्मलोकम् ।...
पूर्णात्पूर्णमुद॑चति पूर्ण पूर्णेने सिच्यते।
उ॒तो तद्य विद्याम् यत॒स्तत्परिषिच्यते॑
॥29॥ अथर्वः १०.८.२६
तर्जः मळयुड़ी मिडिमनचिराडिल
(राग-यमन)
आओ हम सब ये जानें, परिपूर्ण है संसारकोई...
अभि सोमास आयवः पव॑न्ते॒ मद्यं मद॑म् ।
समुद्रस्याधि॑ि वि॒ष्टप॑ मनीषिणौ मत्सराः स्व॒र्विदः
॥ साम. ५१८,८५६ ऋ.८.१०७.१४
तर्जः मळयिल रात्री मळयिल कुडियुम
(राग-मेघ मल्हार)
संयम...
अश्वी रथी सुरूप इद्, गोमा इदिन्द्र ते सखा ।
श्वात्रभा वयसे सचते सदा इन्द्रो याति सभामुप
॥ ऋ. ८.४.६
तर्जः मकयित...
पाहि नौ अग्ने पायुभिरज॑स्त्रै कृत प्रिये सद॑न॒ आ शुशुक्वान् ।
मा ते॑ भ॒यं ज॑रितारं यविष्ठ नूनं विदुन्मा पुरं संहस्वः
॥...
प्र मंहिष्ठाय वृहते ब्रहद्रये सत्य सुष्माय तवसे मतिं भरे।
अपामिव प्रवणे यस्ये दुर्धरं राधो विश्वायु शवसे अपावृतम्
॥ ऋ. १.५७.१ अथ...
वृषा ह्यसि भानुना द्युमन्तं त्वा हवामहे। पवमान स्वाध्यः
॥ साम. ४८०-७८४ ऋग. ६.६५.४
तर्जः मळ तुळलीगल पेरिन नीडूमी
पड़ा नालियों में...
तव श्रिया सुदृशो देव देवाः पुरु दधाना अमृतं सपन्त ।
होतारंमाग्निं मनुषो नि पेदुर्दशस्यन्त उशिजः शंसमायोः ॥ ऋ. ५.३.४
तर्जः भीतर...
अ॒ग्निमिन्या॑ने॒ मन॑सा धिय॑ सचेत॒ मर्त्यः ।
अ॒ग्निमधे वि॒वस्व॑भिः॥ ऋग. (८.१०२.२२ साम. १६
तर्जः भजमन भजमन सदा हरि का नाम
यज्ञकर यज्ञकर कर्म...
श्रद्धां प्रातहवामहे श्रद्धां मध्यदिनं परिं।
श्रद्धा युर्य्यस्य निमहुचि श्रद्धे श्रद्धापयेह नः
॥ ऋ. १०.१५१.५
तर्जः जन पळ भर त्हणतील हाय हाय
हे...
व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयाप्नोति दक्षिणाम् ।
दक्षिणा श्रद्धा माप्नोति श्रद्धया सत्यमाप्यते
॥ यः १६/३०
दृष्ट्वा रूपे व्यकरोत् सत्यानृते प्रजापतिः ।
श्रद्धामनृतेऽदधाच्छ्रद्धां सत्ये...
यया॑ दे॒वा असुरेषु श्रृद्धा मुग्रेषु चक्रिरे।
एवं भोजेषु यज्वस्वस्भाक॑मुद्रितं कृधि ॥
ऋ. १०.१५१.३
तर्जः जन पळ भर म्हणतिल हाय हाय
श्रद्धा बल...
श्रद्धां देवा यजमाना वायुगोपा उपासते ।
श्रद्धा हृदय्यश्या कृत्या श्रद्धया विन्दते वसु
॥ ऋ. १०.१५१.४
तर्जः जनपळ भर म्हणतील हाय-हाय
श्रद्धा में अर्पित...
प्रियं श्रद्धे दद॑तः प्रियं श्रद्धे दिदासतः ।
प्रियं भोजेषु यज्व॑स्व॒दं म॑ उदितं कृधि।
ऋ. १०.१५१.२
तर्जः भक्तिच्या फुलांची डोलातो सुवास
श्रद्धावान दानी...
श्रृद्धयाग्नि समिध्यते श्रृद्धयया॑ हूतये हविः ।
श्रुद्धंया भर्गस्य मूर्धनि वच॒सा वेदयामसि
॥ ऋ.१०.१५१.१
तर्जः भक्तिंच्या फुलांचा डोलतो सुवाससुवा
श्रद्धा के फूलों से...
मधुमन्मे निक्रमणं मधुमन्मे परायणम।
वाचा वदामि मधुमद्भयासं मधुसंदृशः ॥ अथ. १.३४.३
तर्जः बोल वीणी बोल
बोल वाणी बोल, बोल वाणी बोलपरिपूर्ण मीठे...
प्र मंहिंष्ठाय गायत ऋतान्चें बृह॒ते शुक्रशर्शोचिषे । उप॑स्तुतासो अ॒ग्नय॑
। ऋ. ८.१०३.८
तर्जः ब्रह्मा विष्णु आणि महेश्वर
आओ मित्रों गायें मिलकर, गायें...
अज्येष्ठासो अकनिष्ठास एते स भ्रातरो वावृधुः सोभगाय ।
युवा पिता स्वपा रुद्र एषां सुदुधा पृश्निः सुदिना मरुद्भ्यः
॥ ऋ. ५.६०/५
तर्जः...



































































































