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दीपावली (बवसंस्येष्टि पर्व) की हार्दिक शुभकामनाएँ
पर्यावरण शुद्धि यज्ञ
स्थान: गोल चक्कर पार्क, थापर नगर, मेरठ
आदरणीय महोदय/महोदया,
दीपावली के पावन अवसर...
आर्य समाज जमौर, शाहजहाँपुर का 44वाँ वार्षिकोत्सव एवं चतुर्वेद शतकम् यज्ञ-सत्संग
महर्षि दयानन्द सरस्वती जयन्ती विशेष आयोजन
दिनांक: 11,...
महर्षि दयानन्द सरस्वती जयन्ती एवं आर्य समाज वार्षिकोत्सव
स्वराज्य के प्रथम उद्घोषक — ऋषि दयानन्द
धर्मानुरागी, राष्ट्रप्रेमी सज्जनों, आप सभी को जानकर...
महर्षि दयानन्द सरस्वती जयन्ती पर भव्य आयोजन
दिल्ली की समस्त आर्य समाजों एवं संस्थाओं की ओर से आर्य समाज...
प्रभु के गुणगान
(तर्ज-खिलौना जानकर मुझ को मेरा दिल तोड़े जाते हो)
तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि सब सर झुकाते हैं।तुम्हीं...
तेरी शरण में
(कर्ज-कन्हैया कन्हैया तुझे आना पड़ेगा)
दिलों में सभी प्यार लाये हुए हैं।शरण में तेरी नाथ आए हुए हैं।
१. उठी...
प्रभु का सहारा
(तर्ज - दयानन्द के वीर सैनिक बनेंगे)
प्रभु के बराबर सहारा नहीं है।हितु और कोई हमारा नहीं है।प्रभु के...
ओम् का झण्डा आया
ओम् का झण्डा आयायह ओम् का झण्डा आया।
९. ऋषि ने लाखों कष्ट उठाये।जहर पिया और पत्थर खाये।फिर...
सृष्टि तथा वेद की उत्पत्ति
(तर्ज- हे दयामय हम सबों को शुद्धताई दीजिये)
१. प्राकृतिक परमाणुओं की मूल सामग्री जुटी।स्वयंभू परमात्मा ने...
सर्वे भवन्तु सुखिनः ट्रस्ट
के तत्वावधान में आयोजितवेदोक्त प्रवचन एवं यजुर्वेद महायज्ञ
महर्षि दयानन्द सरस्वती स्मृति कार्यक्रम
आचार्य सोमदेव आर्य जी
(स्वामी आत्मानन्द...
संभागीय आर्य वीर दल आर्य समाज का दशहरा मिलन समारोह
समस्त आर्यवीरदल ओर आर्य समाज के कार्यकर्ताओं को हर्ष पूर्वक सूचित...
सृष्टि कथा (वार्षिक कार्यक्रम—श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास)
दिनांक— 14, 15 व 16 नवम्बर(शुक्रवार, शनिवार एवं रविवार)
सादर नमस्ते जी, आपकी...
स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक जी
(योगाचार्य एवं दर्शनाचार्य)निदेशक: दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरातअध्यक्ष: दर्शन योग धाम, लाकरोड़ा, जिला गांधीनगर, गुजरात
वेद प्रचार...
(लेखक: वेदानन्द वेदवागीश)
आर्य समाज के आशा प्रदीप
श्री सत्यव्रत अग्निवेश आर्यसमाज के बढ़ते नवयुवकों में आशा प्रदीप थे, विधि ने यह...
विद्वान् ब्रह्मचारी पं० विक्रम जी
गुरुकुल झज्जर में आगमन
जब नवम्बर १९४२ दीपमाला के अवसर पर मैंने सेवार्य गुरुकुल झज्जर को "पूज्य...
यस्त॑ इ॒ध्मं ज॒भर॑त्सिष्विदानो मूर्धानं वा तृतर्पते त्वाया।
भवस्तस्य स्वतवाँः पायुरग्ने विश्वस्मात्सीमुघायत उरुष्य ॥ ऋः ४.२.६
तर्जः मोली मोली कातिरुन्दर गणी कोरमग-राग-भूपाली...
विष्णोर्नु क॑ वी॒र्याणि प्र वर्वोचं यः पार्थिवानि विमुमे रजांसि ।
यो अस्क॑भाय्युत्तरं स॒धस्य॑ स॒धस्य॑ विचक्रमा॒णस्त्रेधोरु॑णा॒यः
॥ ऋः १.२२.१६
तर्जः मोली मोली कातिरुन्दर...
असृक्षत॒ प्र वा॒जिनौ गुव्या सोमा॑सो अश्व॒या। शुक्रासौ वीर्याशवः
।। ऋः ६.६४.४
तर्जः मैत्रीनो अजुनका
वाणी में जादू तो सन्त जगायेगा, अपने तक नहीं...
अ॒यं द्यावा॑पृथि॒वी वि ष्कंभायद॒यं रर्थमयुनक्स॒प्तर॑श्मिम् ।
अ॒यं गोषु शच्या प॒क्म॒न्तः सोमो दाधार् दशयन्त्रमुत्स॑म्
।। ऋः ६.४४.२४
तर्जः मैं तो साँवरे के...
मूर्धा दि॒िवो नाभि॑िरा॒ग्निः पृथिव्या अर्घाभवद्ररती रोद॑स्योः ।
त्वं त्वां देवासौ ऽजनयन्त दे॒वं वैश्वानर॒ ज्योति॒रिदार्याय।
। ऋः १. ५६.२
तर्जः मैं तो इक...
ते घेद॑ग्ने स्वा॒ध्योऽहा विश्वा नृचक्षसः । तर॑न्तः स्याम दुर्गहा।
। ऋ. ८.४३.३०
तर्जः मैं केवल तुम्हारे लिए गा रही हूँ
तुम्हारे बताये ही...
समानी व कूतिः समाना हृदयानि वः।
समानम॑स्तु वो मनो या वः सुसुहास॑ति ।
ऋः १०. १६१.४
तर्जः मेले विन्निन मुत्ततारी-943/2453 राग-देस
ऐ...
समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमे॑षाम् ।
समानं मन्त्रभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि ॥ ऋः १०.१६१.३
तर्जः...
सं गच्छध्वं सं व॑दध्व॒ सं वो मनांसि जानताम् ।
दे॒वा भागं यथा पूर्व संज्ञानाना उपासते
। ऋः १०. १८१.२
तर्जः मेले...
कस्य॑ नूनं क॑त॒मस्या॒मृता॑नं मनामहे चारुं देवस्य॒ नाम॑ ।
को नौ मुह्या अद॑ितये॒ पुन॑र्दात् पि॒ितर॑ च दृशेयं ममा॒तर॑ च
॥ ऋः...
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शृण्वो वृष्टेरिव स्वनः पवमानस्य शुष्मिणः। चरन्ति विद्युतो दिवि। साम. ८६४
तर्जः मेजवाने पाँदळे ओढ्या माधव तमे
साधक की...
य॒मस्य॑ लोकादध्या व॑भूविय॒ प्रम॑दा मया॒न्द्र युनक्षि धीर॑ः ।
एकाकिनना॑ स॒रथं यासि वि॒िद्वान्स्वप्नं मिमा॑नो असुरस्य॒ योनौं ।॥ अथ. १६. ५६.१
तर्जः मेघालय...
आ पवस्य दिशां पत आर्जाकात् सौम मीङ्कः ।
ऋत॒वा॒केन॑ स॒त्येन॑ श्रृद्धया॒ तप॑सा सुत इन्द्रायन्द्रो परिं स्रव ऋः ६.११३.२
तर्जः मुटुवा...
यत्र ज्योतिरजस्त्रं यस्मिंल्लोके स्वर्हितम् तस्मिन्मां
देहि पवमानामृते लोके अक्षित इन्द्रायेन्दो परिस्रव।। ऋः ६.११३.७
तर्जः मृदुवा गवेतु कवि मिदवा
आत्मा को दर्शन...
त्वं सौमासि सत्प॑ति॒स्त्वं राजोत वृत्रहा। त्वं भुद्रो अ॑सि क्रतुंः
॥ ऋः १.६१.५
तर्जः मुटुमन्द हासम मलमलियाति
हे सोम सितान्शु, है जनक तू...
समीचीनार्स आसते॒ होता॑रः सुप्तामयः ।
प॒दमेक॑स्य॒ पिप्र॑तः॥ ऋः ८.१०.७
तर्जः मूर्तिमन्त भगवन्त भटेला
ज्योति इन्द्रियाँ, इन्द्र देवता॥
भजन
ये जो इन्द्रियाँ हैं करें...
वाममुद्य संवितर्वाममु श्वो द्विवेद॑िवे वा॒मम॒स्मभ्यं सावीः ।
वामस्य हि क्षय॑स्य देव॒ भूरि॑रया धिया वामभार्जः स्याम
तर्जः मूर्ति अशी साजरी ग...
किमार्ग आम वरुण ज्योष्ठं यत् स्तो॒तार॒ जियाँ मसि सखायाम् ।
प्र तन्में वोचो दूळभ स्वधावो ऽवं त्वानेना नमसा तुर ईयाम्।।...
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इन्दुः पविष्ट चेतनः प्रियः कवीनां मतिः। सृजदश्वः रथीरिव
।। ऋग. ६.१६४.१० साम. ४८१
तर्जः...
त्वं तमग्ने अमृतत्व उत्तमे मर्त दधासि श्रवसे दिवेदिवे ।
यस्तातृषाण उभयाय जन्मने मयः कृणोषि प्रय आ च सूरये
॥७॥ ऋः...
प्रसुस्तोमं भरत वाजयन्तं इन्द्राय सत्यं यदि सत्यमस्ति नेन्द्रौ
अस्तीति नेम उत्व आहं कई ददर्श कमभिष्ट वाम ॥3॥
अयमस्मि जरितः पश्य...
त्वं विश्वस्य मेधिर दिवश्च ग्मश्च राजसि । स यामनि प्रति श्रुधि
॥२० ऋः १. २५.२०
तर्जः मुळिगलुम मौनम गणम
सत्यवचन वाचाल...
मम त्वा सूर उदिते मम मर्ध्यान्दने दिव्यः ।
मम प्रपित्वे अपिशवरे वसवा स्तोमासो अवृत्सत ॥ ऋः ८.१.२६
तर्जः मुंजई कुटुमवालुम कुटुम...
आ पप्रो पार्थिव रजो वद्वघे रोचना दिवि।
न त्वावाँ इन्द्र कश्चन न जातो न जनिष्यतेऽ विश्व ववक्षिय
।। ऋः १.८१.५
तर्जः मुक्या...
प्र वयो॑ मि॒त्राय॑ गायत॒ वरु॑णाय वि॒पा गिरा। मह॑िक्षत्रावृतं वृहत्
॥ ऋः ५.६८.१ साम. ११४३
तर्जः मी ही अशी भोळी कशी ग
गीत...
यम॑ग्ने॒ मन्य॑से र॒यिं सह॑सावन्नमर्त्य तमा नो वाज॑सातये॒
वि वो मद॑ य॒ज्ञेषु चित्रमा भ॑रा विव॑क्षसे।। ऋः १०.२१.४
तर्जः मीरा बाई कातर वेड़ी
हे...
सक्तुमिव तित॑उना पुनन्तो॒ यत्र धीरा॒ मन॑सा॒ वाच॒मव॑त ।
अत्रा सखायः सुख्यानिं जानते भ॒द्रेष लक्ष्मीर्निहिताधि॑ि वा॒चि।॥ ऋ. १०.७१.२
तर्जः मी बाळ असा...
युत्किं च॒दं व॑रुण दैव्ये॒ जन॑ऽभिद्रोहं मनुष्याई भरांमसि ।
अर्चित्ती यत्तव॒ धर्मायुयोप॒म मा न॒स्तस्मा॒देन॑सो देव रीरिषः ॥ अथ. ६.५१.३
तर्जः मी...
मा त्वा सोम॑स्य॒ गल्द॑या॒ सदा याच॑न्न॒हं ग्रा।
भृर्णि मृगं न सर्वनेषु चुक्रुधं क ईशानं न याचिपत
।। ऋः ८.१.२०
तर्जः...
दृते दृहं मा।ज्योक्ते सुन्दृर्शि जीव्यासं ज्योक्तै सन्दृर्शि जीव्यासम् ॥ यजु. ३६/१६
तर्जः माविन चोटिले मळ्मुळले मधुरमाय-086/214 राग मिश्र खमाज
भाजन बन...
१ २ ३२३ १२३१ २ ३१२ २उ ३ १२ शं
नो देवीरभिष्टये शं नो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु नः...
स नः पप्रिः पारयाति स्वस्ति नावा पुरुहूतः। इन्द्रो विश्वा अति द्विषः
॥ ऋः ८.१६.११
तर्जः मिड़ीतुम्मिल पुणरुम्न नेरम परयादे अरियुम अनुरागम
तरणी...
कन॑िक्रन्ति हरिरा सृज्यमानः सीद॒न्वन॑स्य जुठरै पुना॒नः ।
नृर्भिर्युतः कृणुते निर्णजूं गा अततो॑ म॒तीर्ज नयत स्व॒धार्भिः
।। साम. ५३० ऋ. ६.८५.१
तर्जः...
रथाय नावमुत नो गृहाय नित्यारित्रां पद्धती रास्यग्ने ।
अस्माकं वीरौं उत नो मघोनो जनाँश्च या पारयाच्छर्म या च।
। ऋः १....
तू कर ले प्रीति ओम् से
ओ अभिमानी बन्दे ! तू कर ले प्रीति ओम् से।तज कर झूठे धंधे ! तू...
तेरे मन्दिर में आया करूँ
(तर्ज- तुम अगर साथ देने का वादा करो)
मैं तेरे प्रेम की धुन में गाता हुआजब कभी...
सहारा मिल गया
जिस को प्रभु के नाम का जग में सहारा मिल गया।उस नाव को मंझधार में समझो किनारा मिल...
कर्म खोटे तो ईश्वर के भजन गाने से क्या होगा।
(तर्ज- हमारी याद जब आये तो आंसू बहा लेना)
कर्म खोटे तो...
सबके पालनहार हो प्रभु जी।
सबके पालनहार हो प्रभु जी।जन जन के दातार हो प्रभु जी।सब के पालनहार हो प्रभु जी………
अन्तर्यामी...
ग़रीबों की पुकार
(तर्ज-जान सके तो जान)
कर मुश्किल आसान।सूख रही है जीवन खेतीदेख जरा भगवान् ।कर मुश्किल आसान…..
१. ऐ विधाता जग...
प्रभु याद रहे
(तर्ज-चले जा चले जा चले जा जहाँ प्यार मिले)
भूले न भूले न भूले न प्रभु याद रहे।भूले न...
तू पिता तू ही माता
(तर्ज- ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन)
तू पिता और तू ही माता तू सखा,तू...
दुनियाँ का वाली
(तर्ज-चली मेरी दुल्हन की डोली)
प्रभु तू है दुनियाँ का वाली।झूम के डाली डालीगाती है कोयल काली।प्रभू तू है……….
१....
सब का मालिक
(तर्ज- यह सारी दुनियाँ है आनी जानी तो)
सब का तू मालिक जग का भण्डारी।सारा जमाना तेरा पुजारी है।सब...
ओ३म् भज मेरे मन
(तर्ज-बात इतनी सी है कह दो कोई दीवानों से)
तोड़ कर दुनियाँ के बन्धन प्रभु दीवाना बन।ओ३म् भज...
सफल ज़िंदगी
(तर्ज- रात दिन गुरु के गीत गाए जा)
जो भी उस प्रभु के गीत गाएगा।ज़िन्दगी सफल वही बनाएगा।
१. क्योंकि वह...
प्रार्थना - हे प्रभो वर दीजिए धारण करें सन्तोष हम।
(तर्ज-यज्ञरूप प्रभो हमारे भाव उज्वल कीजिए)
हे प्रभो वर दीजिए धारण...
अग्ने क्दा त आनुपरमुवद्द्वस्य चेतनम् ।
अा ही त्वां जगृचिरे मर्ता सो विक्ष्वीय॑म् ॥ ऋः ४.७.२.
तर्जः मालवून टाकदीप
हे जगत के...
अव॑ ते हेळो वरुण नमौभि॒िरव॑ य॒ज्ञेभिरीमहे हृविर्भिः ।
क्षय॑न॒स्मभ्यम॑सुर प्रचेता॒ राज॒त्रेनासि शिश्रथः कृतानिं ॥14॥ ऋ. १.२४.१४
तर्जः मालवून टाकदीप-484/490
आ प्रभु से...
ओ३म् । तुभ्येमा भुवना कवे महिम्ने सौम तस्थिरे। तुभ्य॑मर्षन्ति सिन्धवः ॥
तर्जः मरिविल पुन्गुई ले मनीवांग
प्रभु तुमसे प्यार करता रहूँगाऋत-सत्य नियमों...
सुशेवों नो मृठ्याकुरदृप्तक्रतुरवातः । भवां नः साम् शं हृद
।। ऋ. ८.७६.७
तर्जः मारा घटमा विराजता श्री नाथ जी
हमारे हृदयों...
आर्य समाज महावीर नगर का वार्षिकोत्सव : यज्ञ, भजन, प्रवचन और सम्मान समारोह
महावीर नगर।महर्षि दयानन्द जयन्ती सरस्वती 104-3024 के उपलक्ष्य...
महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती पर वीर पर्वोत्सव का भव्य आयोजन
वाराणसी।विजया दशमी के पावन पर्व पर इस वर्ष महर्षि दयानन्द सरस्वती...
आबूपर्वत में स्वामी धर्मानन्द विद्यापीठ का शिलान्यास समारोह
आबूपर्वत।आर्ष गुरूकुल महाविद्यालय, आबूपर्वत की नई शाखा स्वामी धर्मानन्द विद्यापीठ का भव्य शिलान्यास...
वैदिक प्रार्थना
(तर्ज-बनो आर्य खुद और जहाँ को बना दो)
दयामय प्रभु जी दया हम पे कर दो।तुझे वर सकें हम हमें...
कहीं झूठ कहीं छल
(तर्ज-कभी धूप कभी छाओं)
कहीं झूठ कहीं छलकहीं झूठ तो कहीं छल।नर तन चोला फिर न मिलेगाइन बदियों...
भगवान् की रचना
(तर्ज - मेरे देश की धरती सोना उगले)
भगवान् की रचना बड़ी निरालीबड़ी ही सुन्दर न्यारी।भगवान् की रचना………
१. कितनी...
इन्साफ़ है जो भगवान् करे
(तर्ज - छू लेने दो नाजुक……)
अच्छा ही सभी कुछ होता है,इन्साफ़ है जो भगवान् करे।फिर उसका...
अपरम्पार माया
(तर्ज - फिरकी वाली तू कल फिर आना)
रखवाले। जमाने से है न्यारा जो प्राणों से भी प्यारातू सच्चा करतार...
विजय दशमी के पावन पर्व पर महर्षि दयानन्द जयन्ती सरस्वती 124-2024 "वीर पर्वोत्सव
तिथि : 2 अक्टूबर 2025, गुरुवार समय...
अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश ऑनलाइन कोर्स पढ़ेंहज़ारों वर्षों के मुग़ल और अंग्रेज़ों से ग़ुलाम हिन्दू समाज के रगों में क्रांति...
युवा चरित्र निर्माण शिविर
स्थान : गुरुकुल आश्रम, आमसेना, खड़ियार रोड (ओडिशा)तिथि : 01 अक्टूबर 2025 से 06 अक्टूबर 2025...
गुरुकुल विश्वभारती, भैयापुर (रोहतक) का 34वाँ वार्षिक महोत्सव
“सा प्रथमा संस्कृतिर्विश्ववारा”वही प्रथम वैदिक संस्कृति ही विश्व द्वारा वरण योग्य है(प्राचीन व...
महर्षि दयानन्द सरस्वती स्मृति भवन न्यास, जोधपुर में 142वाँ ऋषि स्मृति सम्मेलन
ऋषियों की वाणी, वेदों का ज्ञान और मानवता की...
जिला आर्य प्रतिनिधि सभा आगरा एवं आर्य समाज राजामण्डी द्वारा आयोजित
ऋग्वेद – यजुर्वेद – सामवेद – अथर्ववेद का पावन संदेशॐ
जिला...
कृणवन्तो विश्वमार्यम
सदा सुख शान्ति फैले मेरे भगवान दुनियाँ में, बनायें फिर से हम अपने वतन की शान दुनियाँ में। व्रतधारी,...
गुरुकुल हरिपुर, जुनानी, पो.-गोड़फूला, जिला- नुआपड़ा (ओड़िशा) में आर्यवीर दल का विशेष शिविर आयोजित किया जा रहा है। यह शिविर...
इन्द्रो यातोऽवसितस्य राजा शमस्य च शृङ्गिणो वज्रवाहुः ।
सेदु राजा क्षयति चर्षणीनामरान्न नेमिः परि ता बभूवः ॥ ऋः १.३२.१५
तर्जः मारा...
अत्रि॒मनु॑ स्व॒राज्य॑म॒ग्निमुक्थान॑ वावृधुः। विश्वा अघि श्रियाँ दथे।
॥ ऋः २.८.५
तर्जः मारगड़ी तिंगड़ अल्लवा-1126 राग भैरवी
कर्म फल भोगने आया, कार्य नये करने...
दयाधन ! हो तव जय जयकार ॥ ध्रुव ॥भारत नहीं किन्तु ऋषिवर ! तव ऋणी सकल संसार ॥ ध्रुव ॥
सघन...
शीत शिशिर हेमन्त का हुआ परम प्राधान्य ।
शीत शिशिर हेमन्त का,हुआ परम प्राधान्य ।तैल, तूल, तपन का,सब जग में है...
कूलन में केलिन में कछारन में कुञ्जन में।
कूलन में केलिन में कछारन में कुञ्जन में।क्यारिन में कलित कलीन किलकंत है...
है ऋतुराज का आगमन
है ऋतुराज का आगमन,जल-थल में छवि आई है।प्रकृति देवी नवल रंग मेंरंगमञ्च पर आई है ॥
विरस द्रुमों...
दुःखद दूर हुआ हिम-त्रास है
दुःखद दूर हुआ हिम-त्रास है,सुखद आगत श्री मधुमास है।
अब कहीं, दुःख का न निवास है,सब कहीं...
नारी है निकेत सब, दिव्य ललित भावों का
नारी है निकेत सब,दिव्य ललित भावों का,प्रतिमा मधुरिमा की,प्रेम की परम धार।उसकी नारि...
विश्वविदित गुजरात देश में टंकारा इक सुन्दर ग्राम।
विश्वविदित गुजरात देश में,टंकारा इक सुन्दर ग्राम।उसमें था औदीच्य ब्राह्मणों का,कुल बहुश्रुत एक...
सुन्दर भोजन वस्त्र, राजसुख जिसने छोड़ा।
सुन्दर भोजन वस्त्र, राजसुख जिसने छोड़ा।सास, ससुर, परिवार-प्रेम का बन्धन तोड़ा ॥हठकर पति के संग...
था वसन्त, परन्तु आर्यजाति-वर-लता नहीं फूली थी
था वसन्त, परन्तु आर्यजाति-वर-लता नहीं फूली थी,ब्रह्मचर्यं आदित्य-किरण तन-गगन नहीं झूली थी।क्षमता-शीलता-मेल-मलयमय स्नेह-समीर नहीं...
जिसकी पवित्र वेदविद्या मंगला के आगे
जिसकी पवित्र वेदविद्या मंगला के आगे,पापिनी अविद्या दुःखद का मुख बन्द है।लुक्कड़ लताड़े, मतवाले दर्पहीन...
भारतरत्न मूलशंकर ने मंगल मूल विचार किया।
भारतरत्न मूलशंकर ने मंगलमूल विचार किया।होकर दयानन्द ऋषि नामी,जीवन परमोदार किया।कौतुक देख चपल चूहे...
ऋषिराज ! आज तेरा जग गान गा रहा है।
ऋषिराज ! आज तेरा,जग गान गा रहा है।चुपचाप चारु चेरा,बन मान पा...
एक अविनाशी अजन्मा विश्वधर धाता तू ही।
एक अविनाशी अजन्मा विश्वधर धाता तू ही।लोक-नायक न्यायकारी तू पिता माता तू ही ॥धर्मरक्षक...
फूल बरसाते गुणी पद ज्ञान के गाते चले ।
फूल बरसाते गुणी पद ज्ञान के गाते चले ।लाख ही लाहौरवासी शोक...
वेदविद्या के विनोदी, बुद्धि बुद्ध विहार थे।
वेदविद्या के विनोदी, बुद्धि बुद्ध विहार थे।मातृभू के मान मोदी, धैर्य-धर्माधार थे ॥तर्क के...



































































































