भूल हो गई लुट गये

0
13

भूल हो गई लुट गये (धुन-झूठ बोले कव्वा काटे)

भूल हो गई लुट गये
भैया कोई फिर मत यह कहियो।
परिवर्तन होने वाला है
सब जागते रहियो । । टेक ।।

दिन के बाद में रात,
रात के बाद में दिन की बारी हो।
अंधेर के बाद प्रकाश प्रकाश
के बाद में फिर अधियारी हो।।

दोनों में अन्तर भारी हो
और चाल हमेशा न्यारी हो।।
एक जीती हो एक हारी हो।।
हारी भारी ख्वारी का कोई
दुख मत सहियो ।।1।।

परिवर्तन के बाद देखना
यह सब ढंग बदल जायेगें।
भाषण भूषण भवन व
भोजन दुर्जन मलंग बदल जायेंगें।

पशु पक्षी रंग बदल जायेगें
कुछ उमंग के संग बदल जायेंगें।
कुछ होकर तंग बदल जायेगें ।।
तंग होने वालों का कोई
हाथ मत गहियो।।2।।

आ गया समय शोषकों
को अब शोषित जनता संहारेगी।
धूर्तो को चुन-चुन मारेगी
अपने सब बदले उतारेगी।।

वह जीतेगी या हारेगी
इस बात को नहीं विचारेगी।
कुल दुनियां को ललकारेगी।।
भाग्यवाद के बहाव में
अब कोई मत बहियो।। 3।।

पाप की बिल्डिंग कोठी बंगले
गोले लग-लग ढह जायेंगें।
अग्नि के शोलों में पर्वत
शीशे की तरह तह जायेगें।।

शोणित के नाले बह जायेंगे
कुछ मर जायेंगे कुछ रह जायेंगें।
जो रह जायेंगे वह कह जायेंगे ।।
‘प्रेमी’ निःसहाय निर्दोषों को
कोई मत दहियो।।4।।