भारत माता की नैंया, है बीच धार में।
तर्ज – अफ़साना लिख रही हूँ…….
भारत माता की नैंया,
है बीच धार में।
ना दमखम है कितना भी,
इसकी पतवार में।।
भारत माता की…………
ना पालते गऊओं को,
कैसे हैं लोग “सचिन”
फिरते हैं सैर कराते,
कुत्तों को कार में ना दमखम है……..
पथ भूल गये वेदों का,
मन है पाखण्डों में
जल्दी ही सब डूबेंगें,
मेरे विचार में ना दमखम है……..
घी दूध मक्खन छोड़ के,
चाऊमीन खातें हैं
ना दालें सब्जी खाते,
अपने आहार में ना दमखम है..
टी-शर्ट पहनती लड़की,
और जीन्स डालती है
ना बिल्कुल भी शर्माती,
चलती बाजार में ना दमखम है…….










