आर्य प्रचारक धन्य
आर्य प्रचारक ! धन्य-धन्य तुझको शत बार बधाई,
मृतकों में दी जान डाल औ’ वृद्धों में तरुणाई।
सोई हुई बेसुध जनता को जाकर तू ही जगाता,
विपदाओं के तूफानों से निर्भय हो टकराता ।
पाखंडों के गढ़ को ढाता सत्य मार्ग बतलाता,
दयानन्द ऋषिवर का तू घर-घर संदेश सुनाता ।
सूरज सम अज्ञान तिमिर की तूने रात्री हटाई,
आर्य प्रचारक ! धन्य-धन्य तुझको शत बार बधाई।
सुना वीररस युवकों का तू रक्त गर्म कर देता,
कायर सुस्त निकम्मों में भी चेतनता भर देता।
मधुर सुधामय वाणी से तू मन सबका हर लेता,
तेरे दम से बने अनेकों नेता वीर विजेता ।
आर्यसमाज वाटिका सुरभित सुमनों से सरसाई,
आर्य प्रचारक ! धन्य-धन्य तुझको शत बार बधाई।
देश विदेश नगर गाँवों में वैदिक नाद बजाया,
लट्ठ, तेग, गोली व जेल, फाँसी से कब घबराया।
बन्धु विधर्मी हुए शुद्ध करके फिर आर्य बनाया,
यथाशक्ति तूने ऋषि का पावन आदेश निभाया।
करता तू न प्रचार कोटि जन होते यवन ईसाई,
आर्य प्रचारक ! धन्य-धन्य तुझको शत बार बधाई।
घूम रहे हैं आज सहस्रों जग में आर्य प्रचारक,
वानप्रस्थ संन्यासी जन जीवन उद्धारक तारक ।
तजकर प्रिय परिजन प्रचार संलग्न सुविप्र विचारक,
महोपदेशक, भजनोपदेशक सुकवि विविध गुणधारक ।
देश विदेशों में है पावन ओ३म् ध्वजा फहराई,
आर्य प्रचारक ! धन्य-धन्य तुझको शत बार बधाई।
आर्य प्रचारक ! जग में वैदिक धर्म प्रचार किए जा,
ऋषि सम अमृत पिला और को खुद विष घूँट पिए जा।
आर्य समाजोन्नति हित तन मन धन सर्वस्व दिए जा,
सर्वाधार ईश का ही ‘राघव’ आधार लिए जा।
आर्य जगत में होगी तेरी निश्चय कीर्ति बड़ाई,
आर्य प्रचारक ! धन्य-धन्य तुझको शत बार बधाई।
























