अपने घर की गाड़ी को
अपने घर की गाड़ी को, जो चाहो सही चलाना।
सुखदाई व्यवहार हमेशा, पत्नी संग निभाना ।। टेक ।।
कभी किसी से अपनी पत्नी की मत करो बुराई ।
लेकिन उसकी कला-कुशलता की नित करो बड़ाई ।।
बाहर से जो कुछ भी लाओ, करके आप कमाई।
वह सारी निज पत्नी को दे दिया करो तुम भाई ।।
कोई बात कभी पत्नी से, मन की नहीं छुपाना ।।।।।
सुख…..
दिल को नहीं दुखाओ। धीरज धर समझाओ ।।
कभी भूलकर भी पत्नी के, गलती कोई हो जाए तो,
आवश्यक हर वस्तु हमेशा, पत्नी के हित लाओ।
विवाह, वर्षी, जन्म-दिवस भी, उसका आप मनाओ।
सच्ची देवी मान सदा, पत्नी का मान बढ़ाना ।। 2।।
सुख…..
हाव-भाव, मन, इच्छा कुछ-कुछ पत्नी को पहचानो।
मोद मनाती रहे हमेशा, यह मन में व्रत ठानो ।।
विष के तुल्य पराई नारी, होती है सच मानो ।
अपनी को ही सबसे सुंदर, परी अप्सरा जानो ।।
एक नारी व्रतधारी को ही, कहता श्रेष्ठ जमाना ।। 3 ।।
सुख……
सच्चा साथी जीवन-भर का, मानो है ये नारी।
इसकी रक्षा करने से तुम, सुख पाओगे भारी ।।
पूजा करिए मान लक्ष्मी, साँची बात हमारी।
नारी को सुख देने से हो, नैया पार तुम्हारी ।।
कह ‘नरदेव’ हमेशा हँसते-हँसते आयु बिताना ।।4।।
सुख…..
























