अधिकरण मिले तेरा

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अधिकरण मिले तेरा

अधिकरण मिले तेरा
हे रुद्र !! अब शरण दे दे
निस्तेज हो रहा जीवन
मुझे तेजोमय जीवन दे
कह रहा मृदु मन से
रहूँगा मुग्ध प्रभु तुम पे
भूलूँगा ना मैं सुख में
पूजा होगी तेरी मन से

प्रभु मैं तेरी छाया बिन
काटूँ कैसे रात-दिन ?
तपित कर देंगे दु:ख और कष्ट
होगा जीवन छिन्न-भिन्न
अधिकरण मिले तेरा
हे रुद्र !! अब शरण दे दे
निस्तेज हो रहा जीवन
मुझे तेजोमय जीवन दे

मरुत्वान् परमेश्वर!
प्रशस्त देते हो तुम प्राण
हे वृषभ !! इस हृदय की
है तुमसे मार्मिक माँग
प्रार्थना सुन के कर देना
मुझको तुम प्रकाशमान्


अमृतमय जीवन जी जी कर
तेरा करता रहूँ गुणगान
कर्म-कुशलता प्राप्त करूँ
संतृप्ति का हो सम्मान
सिक्त करो प्रभु-प्रेम से मन


हे करुणाकर दयानिधान!
अधिकरण मिले तेरा
हे रुद्र !! अब शरण दे दे
निस्तेज हो रहा जीवन
मुझे तेजोमय जीवन दे

जैसे सूर्य के ताप में
छाया मिलती वृक्ष से
वैसे रुद्र-प्रभु छाया से
दूर करना कष्ट से
व्याकुलता ग्लानि दु:ख विक्षोभ
मनस्ताप उद्वेग विषाद


करना परिवर्तित शान्ति में
दे देना सुख का प्रसाद
हो जाऊँ पा, धन्य तेरा
प्रेम हो जिसमें अगाध
बन्द थे जो चिरकाल से द्वार
खोलो, प्रेम का दो प्रतिसाद


अधिकरण मिले तेरा
हे रुद्र !! अब शरण दे दे
निस्तेज हो रहा जीवन
मुझे तेजोमय जीवन दे
कह रहा मृदु मन से
रहूँगा मुग्ध प्रभु तुम पे
भूलूँगा ना मैं सुख में


पूजा होगी तेरी मन से
प्रभु मैं तेरी छाया बिन
काटूँ कैसे रात-दिन ?
तपित कर देंगे दु:ख और कष्ट
होगा जीवन छिन्न-भिन्न


अधिकरण मिले तेरा
हे रुद्र !! अब शरण दे दे
निस्तेज हो रहा जीवन
मुझे तेजोमय जीवन दे