आदर्श वही परिवार है

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आदर्श वही परिवार है

आदर्श वही परिवार है

आदर्श वही परिवार है,
जो वैदिक नियम निभाता ।। टेक ।।

जिसमें सब रहते हों हर्षित ।
स्वस्थ सुखी हँसमुख आनन्दित ।।
श्रेष्ठ काम होते रहते नित ।
होता मंगलचार है,
हर मानव खुशी मनाता ।। 1 ।।
आदर्श….

सुत सुखदायक हो हितकारी।
मात पिता का आज्ञाकारी ।।
धीर वीर मर्यादा धारी।
जिसका सद् आचार है,
कुल का यश मान बढ़ाता ।। 2 ।।
आदर्श……..

पतिव्रता हो पत्नी प्यारी।
मधुर वचन बोले हितकारी ।।
रखे व्यवस्था उत्तम सारी।
पति-पत्नी में प्यार है,
वह घर ही स्वर्ग कहाता।। 3 ।।
आदर्श……..

होय मित्रता श्रेष्ठ जनों से ।
दूर रहें जो दुष्ट जनों से ।।
करुणा बरतें दुखी जनों से।
यह जीवन का सार है,
जो गृहस्थ इसे अपनाता ।।4।।
आदर्श…….

अर्थ धर्म से सदा कमावें ।
हर नर मेहनत करके खावें ।।
अधर्म का धन कभी न लावें।
उसका बेड़ा पार है,
धन जहाँ धर्म से आता ।।5।।
आदर्श……..

पर-सेवा में हो जिनका मन ।
नित्य कर्म ईश्वर का चिन्तन ।।
मधुर स्वास्थ्यप्रद होवे भोजन।
होते अतिथि सत्कार हैं,
भूखा न द्वार से जाता ।।6।।
आदर्श……..

जिस घर में यह लक्षण पावें।
वही श्रेष्ठ गृहस्थी कहलावें ।।
स्वर्ग यही ‘नरदेव’ बतावें ।
देखो नजर पसार है,
जग उसका ही यश गाता ।।7।।
आदर्श………