लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने बचाया है।

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लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने बचाया है।

लूटा था जमाने ने,
ऋषिवर ने बचाया है।
अपने गुरु विरजानन्द का,
वचन निभाया है।।
लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने……

भ्रमजाल में लोगों को,
बहकाया मक्कारों ने।
अन्याय पाप पाखण्ड से,
दयानन्द ने छुड़ाया है।।
लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने……..

निर्जीव आर्य जाति में,
नव प्राण फूंके ऋषि ने।
सौ बार उठाया है,
सौ बार बचाया है।।
लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने……..

नारी का नहीं था मान,
गौओं को सताया था।
दयानन्द दया सिन्धु,
तारक बन आया है।।
लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने…….

क्या सत्य था क्या था असत्य,
लोगों का पता न था।
सत्यार्थ प्रकाश रचा,
अज्ञान मिटाया है।।
लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने……

गुरुकुल और आर्य समाज,
साँचा था ऋषिवर ने।
आदर्श के फूलों से,
आँगन महकाया है।।
लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने……

जो कुछ था ऋषि के पास,
सब बाँट दिया जग को।
हँस के दिये प्राण,
क्षमा घातक को दे आया है।।
लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने ……

इस युग में नहीं है कोई,
महर्षि दयानन्द सा
निष्काम कर्म ऋषि का,
हर मन में समाया है।।
लूटा था जमाने ने, ऋषिवर ने……