हे प्रभु वर दीजिये, धारण करें सन्तोष हम

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हे प्रभु वर दीजिये,धारण करें सन्तोष हम

हे प्रभु वर दीजिये,
धारण करें सन्तोष हम,

दूसरों के गुण निहारें,
और अपने दोष हम।

सत्य शुद्धाचार,
सद्व्यवहार के होवें धनी,
शुभ गुणों से कर सकें,
भरपूर अपना कोष हम।
हे प्रभु वर दीजिए, धारण करें……

हो सदा निःस्वार्थ मन,
अभिमान कोसों दूर हो,
मन वचन और कर्म से,
होवें सभी निर्दोष हम।
हे प्रभु वर दीजिए, धारण करें……

देश जाति धर्म रक्षा,
के हम प्रहरी बनें,
और सजग होकर रहें,
न हीं कभी मदहोश हम।
हे प्रभु वर दीजिए, धारण करें…….

काँप जायें वेद निंदक,
नास्तिकों की टोलियाँ,
ऊँचे स्वर से बोलें,
वैदिक धर्म का जयघोष हम।
हे प्रभु वर दीजिए, धारण करें…..

दुर्गुणों को छोड़ देवें,
अपना मन हम जीत लें,
इन्द्रियों के दमन में,
पूरा दिखायें जोश हम।
हे प्रभु वर दीजिए, धारण करें……