शिक्षा
पाके सुन्दर बदन, कर प्रभु का भजन,
दुनियाँ फानी का कोई भरोसा नहीं।
जो आया यहाँ उसको जाना पड़े,
जिन्दगानी का कोई भरोसा नहीं।।
वालपन खेल और कूद में खो गया,
फिर बुढ़ापे का आसार आने लगा,
इस सुघड़ बेला में कर कमाई भली,
नौजवानी का कोई भरोसा नहीं।।
पाके सुन्दर बदन, कर प्रभु का …….
अरबों वाले गए खरबों वाले गए,
कितने गोली व गोले रिसाले गए।
कितने राजा गए कितनी रानी गई,
राजधानी का कोई भरोसा नहीं।।
पाके सुन्दर बदन, कर प्रभु का………
श्रेष्ठ जीवन बना, कर सभी का भला,
तेरे जीवन में सुख शान्ति आ जाएगी।
गर करेगा भला तेरा होगा भला,
बदगुमानी का कोई भरोसा नहीं।।
पाके सुन्दर बदन, कर प्रभु का…….
खाली हाथों यहाँ से सिकन्दर गया,
सब खजानों की चाबी धरी रह गई।
वैद्य लुकमान को भी कजा खा गई,
लाभ हानि का कोई भरोसा नहीं।।
पाके सुन्दर बदन, कर प्रभु का………










