अनूप शहरवाले शास्त्री हीरावल्लभ ने

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अनूप शहरवाले शास्त्री हीरावल्लभ ने

दयानन्द बावनी
कवि — दूलेराय कराणी


शास्त्रार्थ विजय


अनूप शहरवाले शास्त्री हीरावल्लभ ने।
शास्त्रार्थ विवाद काज सभा को बुलाई है॥

सभा बीच रखी प्रतिमा को स्वयं महर्षि के।
हस्त से धराऊँ भोग वही बात ठाई है॥

चले शास्त्रार्थ स्वामीजी के शब्दबाण चले।
वेद-धर्म की वहीं विजय दिखलाई है॥

पलटे पंडित वही आप आर्यवीर हुए।
वही मूर्ति को जाके गंगा में बहाई है॥ ३६॥