ब्रह्मचर्य नष्ट कर डाला
ब्रह्मचर्य नष्ट कर डाला,
कैसा हुआ देश मतवाला।
पवन-पुत्र हनुमान बली ने कैसा बल दिखलाया था,
ब्रह्मचर्य के प्रताप से लंका को जाय जलाया था,
रावण-दल में अंगद का नहीं पैर टला था टाला।।ब्रह्म०।।१
‘शक्ति’ खाय उठे लक्ष्मण जी भारी युद्ध मचाया था,
मेघनाथ से शूरवीर को पल में मार गिराया था,
रामायण को पढ़कर देखो है इतिहास निराला।।ब्रह्म०।।२
परशुराम के भी कुठार का जग मशहूर फसाना है,
बाल ब्रहमचारी ‘भीषम’ को जाने सभी जमाना है,
काॅंपे था जग इनके डर से पड़ न जाय कहीं पाला।।ब्रह्म०।।३
चालीस मन के पत्थर को रख छाती पर तुड़वाता था,
लोहे की जंजीरों के वह टुकडे मित्र उड़ाता था,
राममूर्ति मोटर रौके था, है प्रत्यक्ष हवाला।।ब्रह्म०।।४
डेढ़ अरब के मुकाबिले में इकला बीर दाहाड़ा था,
जिसने आकर किया सामना पल में उसे पछाड़ा था,
जिसका नाम सकल दुनियाॅं में “दयानन्द” ऋषि आला।।ब्रह्म०।।५
ब्रह्मचर्य को धारो भाइयों ये एक दवा अनूठी है,
मुर्दे से जिन्दा करने की यह सञ्जीवनी बूटी है,
‘इन्द्र’ कहै कमजोरी को अब दे दो देश निकाला।।ब्रह्म०।।६।
























