खुशी आने से पहले जाने को तैयार रहती है।

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खुशी आने से पहले जाने को तैयार रहती है।

खुशी आने से पहले

खुशी आने से पहले जाने को तैयार रहती है।
गमी आकर सदा इन्सान को गमखार रहती है।
खुशी दहलीज को ही छू के वापस लौट जाती है।
गमी आठों पहर बन करके पहरेदार रहती है।।
खुशी०…..

खुशी को ढूँढने जब आदमी उस पार जाता है।
तो किस्मत कहती है जाओ खुशी उस पार रहती है।। खुशी०…..

खुशी है जीत पर यह जीत जो जीती नहीं जाती ।
गमी है हार यह हरदम गले का हार रहती है।। खुशी०….

खुशी बदतर है ‘नत्थासिंह’ भुला देती है ईश्वर को।
गमी बेहतर है जिस याद में वो सरकार रहती है।। खुशी०…..