दुखी कौन निराश्रित

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दुखी कौन निराश्रित

कौन निराश्रित

दुखी कौन निराश्रित,
दीन विधवा व अनाथ को धीर बँधाता?

पादरी मुल्लों के चंगुल से,
प्रिय राम की संतति कौन बचाता?

शुद्धि का चक्र चला करके फिर,
कौन हमें बिछुड़ों से मिलाता?

आर्यसमाज न होता तो निश्चय,
हिन्दु यहाँ पर दृष्टि न आता।।