कौन निराश्रित
दुखी कौन निराश्रित,
दीन विधवा व अनाथ को धीर बँधाता?
पादरी मुल्लों के चंगुल से,
प्रिय राम की संतति कौन बचाता?
शुद्धि का चक्र चला करके फिर,
कौन हमें बिछुड़ों से मिलाता?
आर्यसमाज न होता तो निश्चय,
हिन्दु यहाँ पर दृष्टि न आता।।
दुखी कौन निराश्रित,
दीन विधवा व अनाथ को धीर बँधाता?
पादरी मुल्लों के चंगुल से,
प्रिय राम की संतति कौन बचाता?
शुद्धि का चक्र चला करके फिर,
कौन हमें बिछुड़ों से मिलाता?
आर्यसमाज न होता तो निश्चय,
हिन्दु यहाँ पर दृष्टि न आता।।
बिना वेद विद्या न कल्याण होगा
मेरे दाता के दरबार में, सब लोगों का खाता।
जन्म-जन्म के चक्कर खाकर, हीरा जीवन मिलता है।
ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है।
ईश हमें देते हैं सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।
पागल सब संसार देखा, पागल सब संसार।
ओ३म् को छोड़,पत्थर का करें सम्मान जो।
भरोसा कर तू ईश्वर पर, तुझे धोखा नहीं होगा।
दुनिया वालों देव दयानन्द, दीप जलाने आया था।
सूरज बन दूर किया जिसने, पापों का घोर अन्धेरा।
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