अच्छे-बुरे विचार
अच्छे-बुरे विचार हृदय में
आते जाते रहते हैं।
बुरे विचार बदल देता है
मानव उसको कहते हैं।।
एक विचार कोटि मनुष्यों को
सत्य मार्ग दर्शाता है।
एक विचार मनुज को जग में
पथभ्रष्ट बनाता है।।
हृदय बेपीर बदल जाते हैं
सुन्दर सभी विचारों से।
गिरते हुए संभल जाते हैं
ज्ञान के सिर्फ इशारों से ।।
पाषाण मुन्ज के हृदय को
पल भर में मोम बना डाला।
बेपीर हृदय में दया भरी
पुलकित रोम-रोम बना डाला ।।
सत्पुरुषों के नीके विचार
सत्पथ प्रदर्शक होते हैं।
अज्ञान तिमिर को हर करके,
भय, पाप कालिमा धोते हैं।।
राज का ताज भोज को देकर
मुन्ज ने वन प्रस्थान किया।
कहै ‘राघव’ आदर्श भोज का
किस्सा मैंने बयान किया ।।
























