आज मंगल गान गाएँ

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आज मंगल गान गाएँ

आज मंगल गान गाएँ

पुष्प सुन्दर खिल रहे हैं,
क्यों न प्रेम-विभोर हो
हम सब मिलें खुशियाँ मनाएँ।
आज मंगल गान गाएँ।।

यज्ञ सुन्दर हो रहा है,
सुरभिमय घर हो रहा है,
क्यों न हम सुकृत सुरभि से,
विश्व को सुरभित बनाएँ।
आज मंगल गान गाएँ ।।

दूर हों सब आपदाएँ,
पूर्ण हों शुभ कामनाएँ,
पूर्ण प्रभु की पूर्ण करुणा से,
प्रकाशानन्द पाएँ।
आज मंगल गान गाएँ ।।