ऐ मातृ शक्ति जाग तू
ऐ मातृ शक्ति जाग तू ले होश अब सँभाल ।
जागेंगे भाग्य देश के होंगे सभी निहाल ।
दयानन्द गांधी शिवा को दी हमने लोरियाँ
बिसमिल व भक्त चूमते फाँसी कर डोरियाँ।
तूने ही देश को दिये राणा शिवा से लाल।
सिनेमा क्लब व पार्टी में जा तू न मचल
गलियों बजारों होटलों में सज के न निकल,
फिर देखे बुरी नजर से है किस की यह मजाल।
जो चाहे गिराना तुझे दे धूल में मिला,
अपमान करने वाले का दे नाम तक मिटा,
गुंडे उठायें आँख तो तू आँख दे निकाल ।
सीता व पद्मा दुर्गा बन तू लक्ष्मीबाई,
ना सामने आये तेरे कोई आतताई ।
संकट के समय ले उठा तलवार और ढाल ।।
चंचल कुमारी ने थी गत मुगलों की बनाई,
झाँसी में धूम लक्ष्मीबाई ने मचाई,
भारत की देवियों का है, इतिहास बे-मिसाल ।
























