बोल बोल निर्भय आर्यवीर जय जय।

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बोल बोल निर्भय आर्यवीर जय जय।

आर्यवीर दल जय
बोल बोल निर्भय/आर्यवीर जय जय।
अजय विजय जय जय/आर्यवीर दल जय।

हर मुश्किल का हल/सेवा का सम्बल।
कर में स्वर्ण कमल/दिव्य भव्य कम्बल।
साहस है अक्षय—तेरी अजय विजय।
आर्यवीर दल जय —————-

जहां कहीं दलदल/खूब मचा हलचल।
रख निगाह पल पल/बन निर्जल का जल।
तू सबसे गत भय –रखना दृढ़ निश्चय।
आर्यवीर दल जय —————-

राखी के धागे/अपना सा लागे।
निशि दिन तू जागे/है सबसे आगे।
मन में वीर विनय –बढ़ने दे न अनय।
आर्यवीर दल जय —————-

मुख न कभी मोड़े/दौड़ाता घोड़े।
दुश्मन को तोड़े/ कभी नहीं छोड़े।
तू है गत संशय –अर्जुन निस्संशय।
आर्यवीर दल जय ——————

बाढ़ भले आंधी/ हर खाई लांघी
नहीं मची धांधी/ मर्यादा बांधी।
हो न तनिक भी क्षय-भय को लागे भय।
आर्यवीर दल जय ——————

दूर रखे मेवा/ करता है सेवा।
हाथ न हथलेवा/ देवा रे देवा।
बल विक्रम परिचय –अक्षत सा अक्षय।
आर्यवीर दल जय ——————

शस्त्र -शास्त्र धारे/ऋषिवर के प्यारे।
गुण सबसे न्यारे/कभी नहीं हारे।
शक्ति -भक्ति संचय -तू सौभाग्य निलय।
आर्यवीर दल जय ——————

पांव जहां धरता/वहां विजय वरता।
सुरभित जग करता/कभी नहीं डरता।
अद्भुत तेरी लय –नव निर्माण प्रलय।
आर्यवीर दल जय ——————

साथी तू सबका/ ढब है बेढब का।
आज नहीं कब का/ देवदूत रब का।
जरा नहीं विस्मय –तू है अमृतमय।
नित इतिहास रचे/ नव मधुमास रचे।
सम उल्लास रचे/नवल प्रकाश रचे।
सज्जन हेतु सदय –दुर्जन हित निर्दय।
आर्यवीर दल जय ——————

जहां जिधर जाये/खुशी बिखर जाये।
प्रकृति निखर जाये/रूप संवर जाये।
करो प्रेम विनिमय –है अनुकूल समय।
आर्यवीर दल जय ——————

दुर्लभ काम करो/ऋषि का नाम करो।
नहीं सलाम करो/आर्य प्रणाम करो।
गीत मनीषीमय–तू है मृत्युंजय।
आर्यवीर दल जय जय
जय जय जय जय।