है भला तेरा इसी में माँस खाना छोड़ दे।

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है भला तेरा इसी में माँस खाना छोड़ दे।

है भला तेरा इसी में
माँस खाना छोड़ दे।
इस मुबारिक पेट में
कब्रें बनाना छोड़ दें॥टेक॥

जो चलाते हल, उठाते
बोझ तेरे वास्ते।
उनकी गर्दन पर जरा,
खंजर चलाना छोड़ दे॥१॥

खाके तिनके रूखे सूखे,
दूध और मक्खन दिया।
उसके बदले खून तू,
उनका बहाना छोड़ दे॥२॥

हैं निहत्थे बेजुबाँ
मुर्गे व दुम्बे बकरियाँ।
उन गरीबों को, यतीमों
को सताना छोड़ दे॥३॥

प्राणी इस दुनिया में जन्मे,
हैं कयामत तक नहीं।
चार दिन का है ये मेला,
जुल्म ढाना छोड़ दे॥४॥

हल्की सी सुई चुभे तो,
दर्द से है चीखता।
बेरहम बनकर तू पापों
को कमाना छोड़ दे॥५॥

पक्षी बकरे मुर्गी मछली
रचना हैं सब ईश की।
इनकी लाशों को ऐ बन्दे
तू पकाना छोड़ दे॥६॥

सारे मजहबों ने भी हिंसा,
को बताया पाप है।
है सरासर पाप यह इक
वहशियाना छोड़ दे॥७॥

नमाज रोजा भक्ति क्या,
जब रहम दिल में है नहीं।
सच्ची इबादत है यही,
जो जुल्म ढाना छोड़ दे॥८॥

मुर्दे खाना चील कुत्तों
गिद्धों का ही काम है।
मुर्दे खा खा पेट में
कब्रें बनाना छोड़ दे॥९॥

इस पवित्र भूमि पर
था चश्मा जारी दूध का।
छोड़ हड्डी माँस यह,
चश्मा सुखाना छोड़ दे॥१०॥