हे नाथ ! दयालु हो बस इतनी दया कर दो

0
22

हे नाथ ! दयालु हो बस इतनी दया कर दो

हे नाथ ! दयालु हो
बस इतनी दया कर दो

आया हूँ शरण दिल में
भक्ति के भाव भर दो
हे नाथ ! दयालु हो
बस इतनी दया कर दो

तेरे रँग में रँग जाये
ये चंचल मन मेरा
रहे साफ, न हो धुँधला
मन का दर्पण मेरा
हर शय में तुझे देखूँ
मेरे देव यही वर दो
हे नाथ ! दयालु हो
बस इतनी दया कर दो

हो कर के दूर तुझसे
सदियों से भटक रहा
नहीं पार मैं हो पाया
अभी भँवर में अटका रहा
हो जाऊँ पार भव से
शक्ति जगदीश्वर दो
हे नाथ ! दयालु हो
बस इतनी दया कर दो

मरता और जीता हूँ
जीकर फिर मरता हूँ
नौ मास गर्भ की जेल में
जाने से मैं डरता हूँ
बन्धन से छूट जाऊँ
कुछ और न धन जर दो
हे नाथ ! दयालु हो
बस इतनी दया कर दो

हो जाऊँ अलग जग के
दु:ख और सन्तापों से
भगवन् दो बचा मुझको
दुर्गुण भरे पापों से
गाऊँ मैं गीत हर दम
तेरे ही मधुर स्वर दो
हे नाथ ! दयालु हो
बस इतनी दया कर दो
आया हूँ शरण दिल में
भक्ति के भाव भर दो