नर नारी सब प्रातः शाम भजलो प्यारे ओम् का नाम ।

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नर नारी सब प्रातः शाम भजलो प्यारे ओम् का नाम ।

नर नारी सब प्रातः शाम,
भजलो प्यारे ओम् का नाम ।
ओम् नाम का पकड़ सहारा,
जो है सच्चा पिता हमारा ।। टेक ।।
वही है मुक्ति का धाम ।।१।।
भजलो प्यारे….

कैसा सुन्दर जगत् रचाया,
सूरज चांद आकाश बनाया।
गुण गाता है जगत् तमाम ।।२।।
भजलो प्यारे……

पृथ्वी और पहाड़ बनाए,
नदियां नाले खूब सजाए।
कर बिन कर्म करे निष्काम ।।३।।
भजलो प्यारे…….

ऋषियों मुनियों ने है ध्याया,
अन्त किसी ने न उसका पाया।
करते हैं उसको प्रणाम ।।४।।
भजलो प्यारे…….

मन अपने को शुद्ध बनाओ,
विषय विकारों से बच जाओ।
यही है वेदों का गान ।।५।।
भजलो प्यारे………

हीरा जन्म गंवाओ ना तुम,
नन्दलाल घबराओ ना तुम।
सन्ध्या करो सुबह और शाम ।।६।।
भजलो प्यारे………