रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो होगी गति क्या ?
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
होगी गति क्या ?
धुरे में जुड़े सारे अरे
घूमे रथ के साथ
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
मध्य में छिद्र है, बाहर ‘नेमि’
दोनों में जुड़े अरे
बैल जब खींचे, इस रथ को
चले गति के साथ
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
होगी गति क्या ?
ऐसे ही अग्नि-परमेश्वर !
देवों में हुए व्याप्त
चारों ओर से व्याप्त ईश्वर
चलते गति के साथ
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
होगी गति क्या ?
देव सूर्य, चन्द्र आदि सभी
चक्र हैं सौर जगत् के
ईश्वर है इन सब में परिभू
जग को करे आबाद
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
होगी गति क्या ?
इन्द्रिय रूप देवों में सभी (भी)
परमेश्वर हैं ‘परिभू’
जीवन का रथ इसी से चले
जब हो प्रभु साथ
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
होगी गति क्या ?
सर्व पदार्थों में अग्नि समान
व्यापक प्रभु हो तुम
करते सम्पादित सर्वसाधन
शक्य शक्ति से आप
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
होगी गति क्या ?
नेमि-सत्ता से घिरे ऐश्वर्य
पाया वो हमने प्रसाद
गायें प्रभु की स्तुति-महिमा
जो है परिभू-प्रकाश
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
होगी गति क्या ?
धुरे में जुड़े सारे अरे
घूमे रथ के साथ
रथ-चक्र में यदि नेमि ना हो
ओ३म् अग्ने॑ ने॒मिर॒राँ इ॑व दे॒वाँस्त्वं प॑रि॒भूर॑सि ।
आ राध॑श्चि॒त्रमृ॑ञ्जसे ॥
ऋग्वेद 5/13/6
रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई










