कुछ काम कर के जाना

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कुछ काम कर के जाना

कुछ काम कर के जाना
दुनिया से जाने वाले
जाते हैं रोज लाखों
बेकार खाने वाले

चौरासी लाखा खोये
हर जन्म-मरण रोये
अब व्यर्थ मत गँवाना
दिन चार जीने वाले
जाते हैं रोज लाखों
बेकार खाने वाले
कुछ काम कर के जाना
दुनिया से जाने वाले

हिंसा असत्य चोरी
कर कर के माया जोड़ी
क्या साथ ले चलेगा
सब छोड़ जाने वाले
जाते हैं रोज लाखों
बेकार खाने वाले
कुछ काम कर के जाना
दुनिया से जाने वाले

जोरू जमीन जर से
करता है क्या मोहब्बत
सब छोड़ने पड़ेंगे
नहीं साथ जाने वाले
जाते हैं रोज लाखों
बेकार खाने वाले
कुछ काम कर के जाना
दुनिया से जाने वाले

जन्मा है जो भी मित्रों
मरना जरूर होगा
अब बेखबर न रहना
दुनिया से जाने वाले
जाते हैं रोज लाखों
बेकार खाने वाले
कुछ काम कर के जाना
दुनिया से जाने वाले

स्वर :- श्री श्याम वीर जी आर्य