उमर है सोलह साल मगर हैं सिर के धोले बाल

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उमर है सोलह साल मगर हैं सिर के धोले बाल

उमर है सोलह साल मगर हैं
सिर के धोले बाल
हो
तेरा क्या कहना।। टेक ।।
सुनो मैं सुना रहा हूं
तुम्हें जो बता रहा हूं


जवान की जवानी है
बिगड़ा है ढंग देखो,
पीला-पीला रंग देखो,
हुआ जाफरानी है
पिचके-पिचके गाल,
हर समय चेहरा रहे निढाल, हो तेरा…।।1।।

हाथ-पैर पतले-पतले,
पेट बड़ा नाड हले,
आज के जवान की
आंखें अन्दर धसी हुई,
कमर आगे झुकी हुई,
दशा मय कमान की खच्चरों वाली चाल,
मांग जुल्फों में करे कमाल,
हो तेरा क्या कहना।।2।।

मांस-मदिरा कोटोजम खाये,
चाय पीये कम से कम दिन में
बीस बार देखता सिनेमा सांग,
पीये सिगरट सुल्फा भांग,
कर रहा है धुआंधार बना फिरे
महिपाल मगर घर में रोटी है
ना दाल हो तेरा क्या कहना।।3।।

अपनी संस्कृति भूला,
पश्चिमी हवाओं में टूला,
जीवन गंवा रहा शोभाराम
सुबह-शाम चलते-फिरते आठो याम
चुटकियां बजा रहा गा रहा बिन स्वर-ताल,
मींचकर आंख, फुलाकर गाल,
हो तेरा क्या कहना।।4।।