वेदों का संदेश सुनाने आए थे
वेदों का संदेश सुनाने आए थे
मानवता का पाठ पढ़ाने आए थे।।
थी मची धांधलेबाजी आ उसने
रोक लगा दी जो जन थे
मिथ्यावादी वेदोक्त उन्हें शिक्षा दी।
राह पर लाए थे ….।।
जो-जो भी दुःखिया पाए,
उनके सब कष्ट मिटाए
अपनेपन से अपनाए,
खुद संकट लाख उठाए।
नहीं घबराए थे….. ।।
सत्यार्थ प्रकाश बनाया,
सारा पाखंड मिटाया
जो दोष मतों में पाया,
लिख साफ-साफ बतलाया
दोष दर्शाये थे ….
कोई माने या न माने,
कोई जाने या न जाने
विद्या के ऋषि खजाने,
मतिमंद देश क्या जाने।
जगाने आए थे ….. ।।
किन चांद के टुकड़े कीने,
किन सूरज मुख में लीना
कोई खुदा का बेटा बनकर,
आया मुक्ति देने वाला।
सभी घबराए थे …..।।










