वेदों को पढ़ना और पढ़ाना चाहिए

0
11

वेदों को पढ़ना और पढ़ाना चाहिए

वेदों को पढ़ना
और पढ़ाना चाहिए,
पढ़ना नहीं तो सुनना
और सुनाना चाहिए ।।
कुछ वाम मार्गियों
ने की ऐसी धृष्टताई,
करके अनर्थ अर्थ का,
बातें गलत बताईं।
यज्ञों में राक्षसों ने,
खूं की नदी बहाई
गोमेध यज्ञ कह के,
गऊओं की बलि चढ़ाई।
गोमेध यज्ञ को
समझाना चाहिए……।।

देखा महात्मा बुद्ध ने
कुछ बकरे जा रहे हैं,
पूछा तो मिला उत्तर,
राजा मंगा रहे हैं।
इनकी बलि चढ़ेगी,
वे यज्ञ रचा रहे हैं,
भगवान वेद में यह,
खुद ही बता रहे हैं।
स्वाभाविक था गौतम
का सर चकराना चाहिये….।।

टंकारे में तब प्रकटा,
एक ज्योति पुंज बांका,
जिसने पुनः गुंजाया,
सत्यार्थ वेद डंका।
शंकासुर ने किया जो
वैदिक धर्म का फंका,
वह शंकासुर क्या था,
यानि मनों की शंका ।
इस शंकासुर को हृदयों
से मिटाना चाहिये…..।।

करने प्रचार निकला,
पाखण्ड खण्डनी लेकर,
दिखलाया सच्चा रास्ता,
अनगिन प्रमाण देकर।
पथ से हुए न विचलित,
प्याले जहर के पीकर,
मुर्दे भी जिन्दा हो गये,
तर्को दलील सुनकर ।
नरेश ऋषि का ऋण
चुकाना चाहिये…..।।