सभा में खड़ा मरदाना ऊधमसिंह बलवान् ।

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सभा में खड़ा मरदाना ऊधमसिंह बलवान् ।

सभा में खड़ा मरदाना
ऊधमसिंह बलवान् ।
कारतूस तो पड़े हुए थे
पाकिट के दरम्यान ।
डायर के नजदीक पहुँचकर
ले लिया ठीक निशान ।। टेक ।।


एकदम याद पिता की आई ।
मुख पर छाई अरुणाई ।
ओ३म् कह कर पिस्तौल चलाई ।
डायर के सीने में दिया गोली
का मार निशान ।। १ ।।

वीर की चली दनादन गोली रे ।
खून की लगा खेलने होली रे ।
पोल अंग्रेजों की सब खोली रे।
सात लाश कर दई सिंह ने
कर दिया लहुलुहान ।। २ ।।

पिताजी मैंने बदला तारा रे।
तेरे पुत्र ने डायर मारा रे।
निज फर्ज अदा किया सारा रे।
सदा रहो सर सब्जो मेरा
प्यारा हिन्दुस्तान ।। ३ ।।

पुलिस ने सिंह घेर कर पकड़ा रे।
सख्त जंजीरों से फिर जकड़ा रे।
रहा निर्भीक जेल में अकड़ा रे।
फांसी दे दो ऊधमसिंह
को है पूरा तूफान ।। ४ ।।