विश्वासों के दीप जलाकर युग ने तुम्हें पुकारा।

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विश्वासों के दीप जलाकर युग ने तुम्हें पुकारा।

विश्वासों के दीप जलाकर
युग ने तुम्हें पुकारा।
सूर्य चन्द्र सा जग में आर्यों
चमके भाल तुम्हारा ।।
सदियाँ बीत गई कितनी ही,
छाया घोर अन्धेरा ।


पल पल ही बढ़ता जाता है,
महानाश का फेरा ।।
जागो मेरे राम सनातन,
संस्कृति को जीवन दो ।
जागो कृष्ण चन्द्र योगेश्वर,
भारत का हर जन हो ।।
जागो बुद्ध तोड़ दो जग के,
भवबन्धन की कारा ।। १ ।।

अनाचार का शीश काटने,
परशुराम तुम जागो ।
जागो भामाशाह राष्ट्र के
हित में सब कुछ त्यागो ।
हरिशचन्द्र जागो असत्य,
और छल की रोको आँधी।
राजनीति का छद्म छुड़ाने,
जागो मेरे गांधी ।।
टूटी है पतवार दयानन्द,
ऋषिवर बनो सहारा ।। २ ।।

। राणा सांगा जागो शत्रु को,
रण का शौर्य दिखाओ ।।
न पवन पुत्र जग पड़ो,
लोभ लंका को आग लगाओ ।।
जागो मेरे चिर अतीत की,
निष्ठाओं सब जागो ।
दो जग को प्रकाश का नूतन,
दान नीन्द अब त्यागो ।
जग में शान्ति प्रेम बरसाओ,
बन सुरसरि की धारा ।। ३ ।।