यह धरती हिन्दुस्तान की।

0
38

यह धरती हिन्दुस्तान की।

यह धरती हिन्दुस्तान की।
ना तेरी है, ना मेरी है,
यह बेटी वीर किसान की ।।
खेत में इसके उगे सचाई,
प्यार भरा खलिहानों में ।
बाग में खुशबू उड़े अमन की,
दिया जले तूफानों में। ।।
एक साथ मिल कंदम बढ़ाए,
है मजदूर किसान की ।। १ ।।

भाव भावना भरत नाट्यम्,
झूमर मणिपुरी की है।
खोकी कत्थक वाली है,
और मुद्रा कथकली की है।।
गले हार तुलसी की माला,
बोली है रस खान की ।। २ ।।

हरयाणा पंजाब के गभरू,
वीर हैं राजस्थान के।
बुन्देले और मर्द मराठे,
मरना जाने आन पे।।
शिवा प्रताप राणी झांसी,
नेताजी के बलिदान की ।। ३ ।।

देता है आवाज हिमालय,
जननी तुम्हें बुलाती है।
बदल रहा इतिहास समय की,
चाल बदलती जाती है।।
पूजन करो वतन की मिट्टी,
मूरत है भगवान् की ।। ४ ।