उठो जवानों आज तुम्हें इतिहास बदलना है।
उठो जवानों आज तुम्हें
इतिहास बदलना है।
इन अनगढ़ चट्टानों का
विश्वास बदलना है।।
माना कि अन्धेरे काले हैं।
हाथों में नहीं मशालें हैं।
पैरों में पड़ गए छाले हैं ।।
उठो जवानों! उर में ले
उल्हास मचलना है।।१।।
दूर दूर तक राहें सूनी।
राते हुई अन्धेरी दूनी।
चारों ओर लुटेरे खूनी ।।
उठो जवानों! उनके खून
की प्यास बदलना है।।२।।
कुछ गौरी और सिकन्दर हैं।
कुछ दुश्मन घर के अन्दर हैं।
कुछ अपने ही जयचन्दर हैं।।
उठो जवानों! उनका करने
विनाश निकलना है ।।३।
रामकृष्ण की तुम हों सन्तानें।
जिनका लोहा सारा जग माने।
अपने आपको भूले मरदाने ।।
उठो जवानों ! ओम् ध्वजा
ले हाथ निकलना है।।४।










