मन फूला फूला फिरै जगत में कैसा नाता रे
मन फूला फूला फिरै जगत में,
कैसा नाता रे-२ ।। टेक।।
मन………..
माता कहे यह पुत्र है मेरा,
बहन कहे भाई मेरा ।
भाई कहे यह भुजा है मेरी,
नारी कहे नर मेरा रे ।।१।।
मन…….
पेट पकड़ के माता रोवे,
भुजा पकड़ कर भाई ।
लपट झपट के तिरिया रोवे,
हंस अकेला जाई रे ।।२।।
मन…….
जब लग जीवे माता रोवे,
बहन रोवे दस मासा रे।
तेरह दिन तेरी तिरिया रोवे,
फेर करे घर वासा रे ।।३।।
मन………
चार जनों के कन्धे चढ़कर,
चढ़ा काठ की घोड़ी ।
नदी किनारे जाय उतारे,
फूंक दिया जैसे होरी रे ।।४।।
मन……..
हाड़ जरे जस लाकडी रे,
केस जरे जस धासा रे।
सोने जैसी काया जल गई,
कोई न आया पासा रे ।।५।।
मन…….
घर की तिरिया ढूंढन लागी,
ढूंढ फिरे चहुं देशा रे ।
कहे कबीर सुनो साधो,
छोड़ो जग की आशा रे ।।६।।
मन……..
तु कर ‘व्यास’ निश्चय,
गुरुकुल की सेवा ।
सफल तेरा जीवन,
बनायेगा गुरुकुल ।।६।।










