कुछ लेना न देना, मगन रहना।।

0
55

कुछ लेना न देना, मगन रहना।।

कुछ लेना न देना, मगन रहना।। टेक ।
पांच तत्व का बना है पिंजरा,
भीतर बोल रही मैना।
तेरा पिया तेरे घट में बसत है,
देखो री सखी खोल नैना ।।

गहरी नदियाँ नाव पुरानी,
केवटिया से मिले रहना।
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
प्रभु के चरन लिपटे रहना।