आर्यों! इस देश की बिगड़ी बनाना है तुम्हें।
आर्यों! इस देश की,
बिगड़ी बनाना है तुम्हें।
वेद की शिक्षा पे चलना,
और चलाना है तुम्हें ।। टेक।।
आर्यो…….
देश की अज्ञानता को दूर,
करने के लिये। आर्यों !
अब धर्म के मैदान में
आना है तुम्हें ।।१।।
आर्यो…..
ज्ञान का प्रकाश लेकर,
आर्यों! आगे बढ़ो।
पाप और पाखण्ड को,
जड़ को हिलाना है तुम्हें ।।२।।
आर्यों……
जितने अत्याचार होते हैं,
धर्म के नाम पर।
‘सत्यार्थ प्रकाश’ से
उनको मिटाना है तुम्हें ।।३।।
आर्यो…….
आपके होते हुए ‘मत’,
दिन बदिन हैं बढ़ रहे।
दुनियां को इनकी बुराई से,
बचाना है तुम्हें ।।४।।
आर्यों……..
आकाश में उड़ना हो,
या पाताल में जाना हो।
डोरी परमेश्वर को, पहले पकड़ा देना ।।३।।
मानव……..
चाहेंगी सदा तुझ को,
खुशियाँ और आशाएं,
चूमेंगी चरण तेरी,
सब और सफलताएँ।
जीवन की ‘पथिक’ उसको,
राहों पे लगा देना ।।४।। मानव….










