आनन्द स्त्रोत बह रहा
आनन्द स्त्रोत बह रहा,
पर तू उदास है, ।। टेक ।।
अचरज है जल में रहकर,
मछली को प्यास है।
आनन्द…..
फूलों में जो सुवास,
ईख में मिठास है।
भगवान् का तो विश्व के
कण-कण में वास है।।१।।
आनन्द….
वीर दिवानगी में है मजा,
जब लगन प्रभु से लगा
ली जायेगी ।।६।।
बिन…..










