मुझे है काम ईश्वर से जगत रुठे तो रुठन दे

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मुझे है काम ईश्वर से जगत रुठे तो रुठन दे

मुझे है काम ईश्वर से,
जगत रुठे तो रुठन दे ।। टेक ।।

कुटुम्ब परिवार सुत दारा,
माल धन लाज लोकन की।
हरी के भजन करने में,
अगर छूटे जो छूटण दे ।।१।। मुझे …

बैठ सन्तों की संगत में,
करूं कल्याण मैं अपना,
लोक दुनियां के भोगों में,
मौज लूटे तो लूटण दे ।।२।। मुझे ..

प्रभु के ध्यान करने की,
लगी दिल में लगन मेरे,
प्रीत संसार विशयों से,
अगर टूटे तो टूटण दे ।।३।। मुझे ….

धरी सिर पाप की मटकी,
मेरे गुरुदेव ने झटकी,
वो ‘ब्रह्मानन्द’ में पटकी,
अगर फूटे तो फूटण दे ।।४।। मुझे….