उर में परमेश प्रतीति-प्रीति
उर में परमेश प्रतीति-प्रीति,
प्रिय आर्य संस्कृति के प्रति हो।
शुभ मति हो दुरितों की क्षति हो,
सुन्दर सुखदायक संतति हो।
निज सद्गुण प्रतिभा ‘प्रकाश’ से,
सुख वैभव जगती में पाओ।
सब विधि सम्मान करे जनता,
तुम दोनों जहाँ कहीं जाओ।
जग में अखण्ड सौभाग्य रहे,
अनुपम अक्षय आनन्द रहे।
होवो तुम आयुष्मान् स्वस्थ,
अनुकूल सच्चिदानन्द रहे।










