गोरखपुर की जेल में बैठा मां को लिखता परवाना।
गोरखपुर की जेल में बैठा
मां को लिखता परवाना।
देश धर्म का दीवाना ।।
जन्मदात्री जननी मेरी ले
अन्तिम प्रणाम मेरा।
जन्म जन्म तक ना भूलूंगा
मैं माता जी अहसान तेरा।
सेवा ना कर सका आपकी
यही मेरा है पछताना ।।१।।
मेरी मौत का मेरी मां से
जब सन्देश सुनाए।
मेरी याद में तेरी आंख से
आंसू ना बह जाए।
वतन पे मरने वालों की
मां को ना चाहिए घबराना ।। २ ।।
सब माताओं की माता है
मेरी भारत माता।
उसकी आजादी की भेंट में
चढ़ने को मैं जाता।
जिसको प्यार नहीं माता से
उसका अच्छा मर जाना।।३।।
होगा वतन आजाद एक
दिन ऐसा भी आयेगा।
स्वर्ण अक्षेरों में मां तेरा
नाम लिखा जायेगा।
‘खेम सिंह’ भी गायेगा बना-
बना तेरा गाना।।४।।










