जीवन में नया उभार-उभार

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जीवन में नया उभार-उभार

जीवन में नया उभार-उभार
ये शिविर आर्यवीरों का।

चार बजे सब उठना सीखें,
कसें लंगोट कुछ करते दीखें।
दण्ड बैठक आसन धार हो
धार-वे शिविर आर्यवीरों का….।

नहा धोकर के हवन रचावें,
मिल प्रेम से खाना खायें।
अन्नपते उच्चार-उच्चार-
येशिविर आर्यवीरों का….।

जहाँ रहें वहाँ करें सफाई,
पढ़ने की जा विधि बताई।
जिसे समझे युवक भार-हो
भार-ये शिविर आर्यवीरों का….।

बौद्धिक देकर बुद्धि बढ़ावें,
जीवन उपयोगी बात बतावें।
जिससे युवकों का हो
उद्धार-उद्धार-ये शिविर आर्यवीरों का….।

लाठी के व्यायाम सिखावें,
खेलने के भी ढंग बतावें।
जिससे बढ़ें आपस में
प्यार हो प्यार-ये
शिविर आर्यवीरों का….।

रात्रि को मनोरंजन होता,
मन्त्र बोलकर हर कोई सोता।
अन्त में धन कुमार-कुमार
ये शिविर आर्यवीरों का….