ओं ओं जपते ही लेना हर श्वास है

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वही पिता-माता है (तर्ज-चुप चुप खड़े हो)

ओं ओं जपते ही
लेना हर श्वास है,
वही पिता मात है
जी वही पिता-मात है।

ओं जपने से जीभा होगी पवित्र,
मिट जाएं पाप, शुद्ध होगा
चरित्र हृदय में तेरे
उजाला हो जाता है।
वही पिता……..

ओं सिमर चित्त निर्मल हो जायेगा,
मन का मैल तेरा सब घुल जायेगा
ज्ञान चक्षुओं से प्रभु दीखें साक्षात हैं।
वही पिता….

परम पिता की पहचान
ऐसी हो गई,
छोड़ के सब नाते जी
भगवान की मैं हो गई

मुसीबत में देते वही
तो मेरा साथ हैं।
वही पिता……