कर जा भला दुनियां में

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कर जा भला दुनियां में

कर जा भला दुनियां में,
मत हीरा जन्म गवां प्यारे।
हर दिल में तेरी याद रहे,
कोई ऐसा कर्म कमा प्यारे ।।

जब तक इस तन में जान रहे,
तुझे पर सेवा का ध्यान रहे।
हो निन्दा या तारीफ तेरी,
उस ओर न कान लगा प्यारे ।।

तुझे वीर जननी ने जाया है,
तुझे होश नहीं क्यो आया है।
एक चमक निराली पैदा कर,
दे दुनियां को चमका प्यारे ।।

ऋषि दयानंद एक अकेला था,
बस ईश्वर एक सहेला था।
जब सत्य सुधारक बन निकले,
दिया सब अंधकार मिटा प्यारे ।।

अब देख कहाँ अँधेरा है,
हुआ साफ ये मारग तेरा है।
सब कांटे ऋषि ने दूर किये,
अब तो साहस दिखला प्यारे।’