चलने की कर ले प्यारे अब तैयारी
चलने की कर ले प्यारे अब तैयारी
आ रही है सबकी धीरे-से बारी
हाथ काँपते, फैले तन में बीमारी
रोज निरन्तर रोगों की है बमबारी
जिनके साथ कभी बचपन में खेले थे
जिनकी पीठ पे बैठ के देखे मेले थे
गूँज रही है उनके घर में सिसकारी
आ रही है सबकी धीरे-से बारी
मृत्यु है बलवान् बड़ी ही इतराती
बिना बताए पास सभी के आ जाती
नहीं बचा फंदे से कोई नर-नारी
आ रही है सबकी धीरे-से बारी
छोटे बड़े सभी को जलते देखा है
फिर भी न आई मुख पे शिकन की रेखा है
क्षणिक सुखों में बहक रहे सब सन्सारी
आ रही है सबकी धीरे-से बारी
अन्त समय में वही बड़ा पछताता है
अवसर खो के धर्म कमा नही पाता है
साथ न जाती भरी हुई धन अलमारी
आ रही है सबकी धीरे-से बारी
मृत्यु नगाड़े जोर जोर से बजते है
चिर निद्रा में सोये क्यों नही जगते है
उठो जगाता वेदज्ञान शुभ ‘हित’कारी
आ रही है सबकी धीरे-से बारी










