मङ्गलमय परमेश्वर! तुम हो सर्वशक्तिमान्
मङ्गलमय परमेश्वर!
तुम हो सर्वशक्तिमान्
रच दिया है ब्रह्माण्ड
तेरी शक्ति है अपरम्पार
भिन्न-भिन्न लोकों का आधार
अनुपम शक्ति महिमा है तेरी
देह है तुम्हारा ही ब्रह्माण्ड
मङ्गलमय परमेश्वर!
तुम हो सर्वशक्तिमान्
रच दिया है ब्रह्माण्ड
अणु-अणु की सत्ता पृथक
फिर भी है परस्पर साथ
आत्मा तुम ब्रह्माण्ड के
जो देहरूप अभिज्ञात
बिन्दु-बिन्दु माला के मनके
बन के तरङ्ग चमकें
मेघ बन के कृपा हम पर बरसे
धुलें पाप, पुण्य बने भाग्यवान्
मङ्गलमय परमेश्वर!
तुम हो सर्वशक्तिमान्
रच दिया है ब्रह्माण्ड
पृथ्वी प्रसन्न है प्रवाहों से
और जलवायु भी प्रसन्न
विश्व सकल भी प्रसन्न हुआ
यह सरोवर है अनुपम
प्राणों के प्राण हे इन्द्र!
क्या मैं भी तो हूँ लघु इन्द्र
मेरी इन्द्रियाँ हैं मेरी सहाय
मैं उनका राजन् हूँ निष्काम
मङ्गलमय परमेश्वर!
तुम हो सर्वशक्तिमान्
रच दिया है ब्रह्माण्ड
धर्म मेघो! मुझ पर बरसो
आशा कलिकाओं पर
बून्द स्वाति टपकाओ मुख में
मेरी प्यास को कर दो तर
व्याकुल है कब से प्यास
पथराई आँखों की आस
मुँह उठाए खड़ा हूँ प्रार्थी बन
एक बूँद तो टपका दे हे दयावान् !
मङ्गलमय परमेश्वर!
तुम हो सर्वशक्तिमान्
रच दिया है ब्रह्माण्ड
तेरी शक्ति है अपरम्पार
भिन्न-भिन्न लोकों का आधार
अनुपम शक्ति महिमा है तेरी
देह है तुम्हारा ब्रह्माण्ड
मङ्गलमय परमेश्वर!
तुम हो सर्वशक्तिमान्
रच दिया है ब्रह्माण्ड










