प्रभु तेरी महिमा किस विध गाऊँ

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प्रभु तेरी महिमा किस विध गाऊँ

प्रभु तेरी महिमा किस विध गाऊँ,
तेरो अन्त कहीं नहीं पाऊँ ॥

अलख निरंजन रूप तिहारो, (1)
किस विधि ध्यान लगाऊँ,
वृक्ष बगीचे रचना तेरी, किस विधि पुष्प चढ़ाऊँ ॥
प्रभु तेरी महिमा . . .

पाँच भूत की देह ना तुम्हरी,
चन्दन किम लिपटाऊँ,
सकल जगत के पालन कर्ता,
किस विधि भोग लगाऊँ
प्रभु तेरी महिमा . . .

हाथ जोड़कर अरज करूँ मैं,
बार बार शीश नवाऊँ,
“ब्रह्मानन्द” हटा दे पर्दा,
घट घट दर्शन पाऊँ ॥
प्रभु तेरी महिमा . . .

प्रभु तेरी महिमा किस विध गाऊँ,
तेरो अन्त कहीं नहीं पाऊँ ॥