सोम-चन्द्र प्यारे वरुण तेरे दर्श को तरसे

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सोम-चन्द्र प्यारे वरुण तेरे दर्श को तरसे

सोम-चन्द्र प्यारे वरुण
तेरे दर्श को तरसे
तेरी प्रीत माँग माँग
बीत गए हैं अरसे
सोम-चन्द्र प्यारे वरुण

प्यारे वरुण ! तुम हो करुण !
दु:ख-वारक ! सुखदायक !
उनको देते हो दर्शन
जिनका हृदय है पावक
प्रभु-दर्श के साधक!
माँग दया उसके दर पे
हृदयोद्गार से मन तरसे
हृदय में घर कर ले
सोम-चन्द्र प्यारे वरुण

आज मैंने देख लिया
मानो अद्भुत रथ मिला
जिस पे बैठ जग का
दुर्गम मार्ग छोड़ चला
अब रहा ना कष्ट कोई
भक्ति भाविक धुन लगी
भक्ति ने तुझे रिझाया
मेघ दया के बरसे
सोम-चन्द्र प्यारे वरुण

प्रभु का रूप सुख-स्वरूप
भूल बैठा सूझ-बूझ
कृत्य-कृत्य हो चुका
प्रीत भरी है अखूट
ना कठिनाई, ना विपत्ति
जब पुकारा प्रेमस्वर
लाए रथ दया भर के
साथ गए ले कर के
सोम-चन्द्र प्यारे वरुण

प्रभु तुम हो विश्वदर्शन
दु:ख-दुरित को हरते
उल्लास प्रेम जगाते
नैना रहे तरसते
पा लिए दर्शन तेरे
आनन्द-मेघ बरसे
ना बरसती तव कृपा
दर्शन कैसे करते ?
सोम-चन्द्र प्यारे वरुण
तेरे दर्श को तरसे
तेरी प्रीत माँग माँग
बीत गए हैं अरसे
सोम-चन्द्र प्यारे वरुण