ये जग सराय मुसाफिर खाना
ये जग सराय मुसाफिर खाना,
इसमें लुभाने की कोशिश न करना।
आये हो बेशक रैन बिता लो.
कब्जा जमाने की कोशिश न करना ।।
तेरे से पहले अनेकों मुसाफिर,
आये कमाये खाये चले गये।
ना खुद रहे न गये सथ लेकर,
तू भी ले जाने की कोशिश न करना ।।
राजा हो रानी या पंडित हो ज्ञानी,
पीर पैगम्बर बलवान धनी।
जो भी आये उनको जाना पड़ेगा.
ममता बढ़ाने की कोशिश न करना ।।
ये दुनिया ये दौलत अमानत प्रभु की,
न हुई किसी की न होगी किसी की।
पहले भी ये न हुई थी किसी की,
अपनी बनाने की कोशिश न करना ।।
लाख चौरासी में गोता लगाकर,
मुश्किल से मानव का चोला मिला है।
सौभाग्य से गर ये मौका मिला है,
मौका गंवाने की कोशिश न करना ।।
रवि, चन्द्र, अग्नि, हवा, अन्न, पानी,
तेरे लिए जिसने पैदा किये हैं।
भिक्षुक कहे जिसने सब कुछ दिया है,
उसे तुम भुलाने की कोशिश न करना ।।










