दिल्ली विजय दीवस
रचनाकार :- चौधरी पृथ्वी सिंह बेधड़क
यवनों से आर्य वीरों की लगी जब होन लड़ाई है।।टेक।।
लड़े आर्य बहादुर ऐसे,
नहीं डरे मौत के भय से,
कटे खेती किसानों की जैसे,
होन लगी ऐसे कटाई है।। १।।
लड़े क्षत्री ऐसे बढ़के,
दुश्मन की छाती धड़के,
राजा ने घोड़े पै चढ़के,
वीरता अजब दिखाई है।। २।।
सब यवन मचावैं हल्ला,
पड़ गया शेरों से पल्ला,
तू अब के बचादे अल्ला,
यह आवाज लगाई है।। ३।।
कुछ गेर दिये तीरो ने,
कुछ मारे शमशीरों ने,
“पृथ्वी सिंह” वहां वीरों ने,
खून की नदी बहाई है।। ४।।










