व्यवस्था से अवस्था जब बाप की हो आपकी।

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व्यवस्था से अवस्था जब बाप की हो आपकी।

व्यवस्था से अवस्था जब
बाप की हो आपकी।
तब हो जानकारी सारी
न्यायकारी बाप की।।
बाप के उद्गार बाप बनके
जान पाओगे।
जब हिसाब लगाओगे
भूलों पै पछताओगे।
दुखों में बिताओगे वह
घड़ी अभिशाप की ।।1।।

प्रगति के पथ पर पुत्र
ज्यों ज्यों ऊपर चढ़ता है।
त्यों त्यों प्रसन्नचित्त नित्य
सुख पिता का बढ़ता है।
जीवन में सुदृढ़ता है
पिता के प्रताप की 2

पितृ देवो भव पिता
देव ‘साक्षात् है।
देवता की पूजा करना
सबसे अच्छी बात है।
विधि यह विख्यात है
पूजा पाठ जाप की ॥3॥

माता पिता की सेवा
का जिसको मिला सौभाग।
जन्म जन्मातरों के
धो गया वह प्रेमी दाग।
श्रेष्ठ डगर पितृ याग
प्रभु के मिलाप की ।।4।।