विषियों में तूने सारा जीवन गवांया
विषियों में तूने सारा जीवन गवांया
जीवन गवांया तू ने, धर्म ना कमाया रे,
धोखा ही खाया। ।टेक ।।
देख-देख जग की रंग रलिया-सुखा
दई जीवन की कलियां कलियां
सुखाई तूने फल भी ना पाया रे,
धोखा ही खाया ।।1।।
जिसको कहता अपना अपना
चन्द समय का है यह सपना
सपनों के अन्दर क्यों भर
माया रे-धोखा….।।2।।
कल था कहीं और आज कहीं है
किसी जगह भी चैन नहीं है
प्रभु को भुला कर तूने दुःख
उठाया रे, धोखा…।।3।।
शोभाराम कुछ नेकी कमाले
अब भी सभंल प्रभु के गुण गाले
माना नहीं तुझे बड़ा समझाया रे धोखा…।।4।।










