विरजानन्द महर्षि गुणों का, सारे मिलकर करते गान।
विरजानन्द महर्षि गुणों का,
सारे मिलकर करते गान।
ज्ञानचक्षु महात्मा का,
हम करते श्रद्धापूर्वक मान।।
गायत्री के जप से जिनके,
हुए सुविकसित अन्तर नेत्र।
इस प्रकार पाया था जिसने,
वेदशास्त्र का सच्चा ज्ञान।।
ज्ञानचक्षु महात्मा का, हम…….
दयानन्द आदर्श शिष्य के,
जो जग में आदर्शाचार्य।
निगमागम विद्या पारंगत,
उन महर्षि का करते यान।।
ज्ञानचक्षु महात्मा का, हम……
लोभरहित जिन अद्भुत गुरु ने,
अजब दक्षिणा माँगी।
दूर करो जग का सारा तम,
करें क्यों नहीं उनका मान।।
ज्ञानचक्षु महात्मा का, हम……
आर्ष पुस्तकों को तज करके,
लोग भटकते फिरते थे।
उनके पठन तथा पाठन की ओर,
जिन्होंने खींचा ध्यान।।
ज्ञानचक्षु महात्मा का, हम……..
श्रद्धांजलि हम अर्पित करते,
उस महर्षि के चरणों में।
अग्नि कभी नहीं बुझने पावे,
जिसे किया उसने आधान ।।
ज्ञानचक्षु महात्मा का, हम…….










